तुरकृत तट से लगे काला सागर में 28–29 नवम्बर 2025 की रात, एक बड़ा समुद्री हमला हुआ हाल ही में काला सागर में रूस के दो ऑयल टैंकर विराट और कैरोस पर ड्रोन से हमले हुए यूक्रेन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। यूक्रेन ने कहा कि ये टैंकर अक्सर दूसरे देशों के झंडे लगाकर रूस का तेल ले जाते थे।

इस हमले से रूस की तेल आपूर्ति और समुद्री गतिविधियों पर असर पड़ा है।इस हमले के लिए समुद्री ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था ये ड्रोन तेज़ गति से टैंकरों की तरफ बढ़ कर उन पर हमला होता जिनसे टैंकरों में आग लग जाती और उनमें काफी नुकसान भी हुआ। इस हमले का मकसद रूस के तेल निर्यात और युद्ध निधि पर असर डालना था। ये टैंकर रूस की शैडो फ्लीट का हिस्सा थे जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद तेल ले जाते थे।यूक्रेन की रणनीति अब सिर्फ जमीन और आसमान तक ही सीमित नहीं है।

बल्कि समुद्री मार्गों और टैंकरों को निशाना भी बनाकर यूक्रेन रूस की तेल तस्करी और युद्ध निधियों को प्रभावित करना चाहता है इन टैंकरों में लगभग 70 मिलियन डॉलर के तेल ले जाने की क्षमता थी।इस तरह के हमलों से रूस के लिए तेल व्यापार और आर्थिक स्थिति पर असर पड़ सकता है। यूक्रेन ने यह साफ संदेश दिया है कि वह अपने ड्रोन हमलों को समुद्री मार्गों तक बढ़ा चुका है।अब तक रूस की ओर से इस हमले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। टैंकरों को हुए नुकसान की पुष्टि भी नहीं हुई है।

लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सुरक्षा विशेषज्ञ इसे रूस की समुद्री गतिविधियों और तेल आपूर्ति पर बड़ा झटका मान रहे हैं।इस घटना से स्पष्ट हो गया है कि युद्ध अब समुद्र तक फैल चुका है। ड्रोन हमले और शैडो फ्लीट पर असर डालकर यूक्रेन ने दिखा दिया कि वह हर मोर्चे पर तैयारी कर रहा है। इस हमले से न सिर्फ रूस की तेल आपूर्ति प्रभावित होगी, बल्कि समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर भी बुरा असर पड़ेगा।काला सागर अब युद्ध का एक नया सेंटर बन गया है। इस घटना ने यह दिखा दिया कि भविष्य में समुद्री मार्गों और टैंकरों को भी निशाना बनाया जा सकता है। इससे विश्व तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ने की संभावना बढ़ गई है।
रिपोर्ट
राजेश राज
