बिहार की सियासत में जंगलराज एक बार फिर सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनकर उभरा है इस पूरे नैरेटिव के पीछे भाजपा नेता नितिन नबीन की अहम भूमिका बताई जा रही है, नितिन नबीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जंगलराज को केंद्र में रखकर चुनावी संदेश देने का सुझाव दिया था इसके बाद PM, मोदी ने अपने चुनावी भाषणों में इस मुद्दे को पूरी मजबूती से उठाया और कुल 189 बार जंगलराज शब्द का इस्तेमाल किया, जबकि 56 बार कट्टा और अपराध का जिक्र किया गया पीएम मोदी के भाषणों का मकसद बिहार की जनता को पुराने दौर की याद दिलाना था, जब अपराध और अराजकता को लेकर राज्य की पहचान बन गई थी बिहार को फिर से उसी अंधेरे दौर में नहीं जाने देना है और विकास व कानून-व्यवस्था ही उनकी सरकार की प्राथमिकता है

इस पूरी रणनीति में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका भी अहम रही। अमित शाह ने चुनावी मैनेजमेंट, संगठन और प्रचार की कमान संभाली उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि जंगलराज बनाम विकास का संदेश हर जिले, हर बूथ और हर कार्यकर्ता तक पहुंचे पार्टी अमित शाह की रणनीति के तहत अपराध, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को चुनाव का मुख्य मुद्दा बनाया गया वहीं, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस अभियान को जमीन पर मजबूती दी नीतीश कुमार ने अपने भाषणों और जनसंपर्क अभियानों में यह बताने की कोशिश की कि उनके शासनकाल में कानून-व्यवस्था में कितना सुधार हुआ है उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि बिहार अब जंगलराज से बहुत आगे निकल चुका है और सुशासन ही राज्य की पहचान है

नितिन नबीन के सुझाए गए जंगलराज मंत्र को पीएम मोदी की आक्रामक भाषण शैली, अमित शाह की चुनावी रणनीति और नीतीश कुमार की स्थानीय पकड़ ने मिलकर एक मजबूत चुनावी फॉर्मूले में बदल दिया यही वजह है कि जंगलराज का मुद्दा बिहार चुनाव में विपक्ष के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया इस रणनीति के जरिए भाजपा और उसके सहयोगियों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि एक तरफ जंगलराज, अपराध और कट्टे की राजनीति है, तो दूसरी तरफ विकास, सुरक्षा और सुशासन यही तुलना बिहार में चुनावी विमर्श का केंद्र बन गई और इसे पार्टी का विनिंग फॉर्मूला माना जा रहा है
