अररिया, बिहार। एक मां जिसे भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है, उसी मां ने अपनी 10 साल की बेटी शिवानी कुमारी का गला रेत दिया, पेट में चाकू घोंप दिया और लाश को मकई के ढेर में छिपा दिया… सिर्फ इसलिए कि बच्ची ने उसका काला सच देख लिया था।

कोशिकापुर वार्ड-5 की पूनम देवी का पति चंदन पंजाब में मजदूरी करता था। पति के नहीं रहने पर पूनम का अवैध संबंध गांव के ही रूपेश कुमार सिंह से हो गया।

शिवानी ने मां को रूपेश के साथ आपत्तिजनक हालत में देख लिया। मासूम बच्ची ने कहा, “मैं पापा को बता दूंगी।”बस यही बात पूनम को नागिन बना गई।जब पता चला कि चंदन घर लौटने वाला है, तो पूनम ने ठान लिया – बच्ची को जिंदा नहीं छोड़ना। 10 जुलाई 2023 की शाम हटिया बाजार से मछली और कीटनाशक दवा खरीदी।

घर आकर मछली बनाई, थोड़ी अलग निकाली और बाकी में जहर मिला दिया।शिवानी ने जहर वाली मछली खाई, बेहोश हो गई। फिर पूनम ने सब्जी काटने वाला चाकू उठाया और बेटी के गले-पर और पेट में एक के बाद एक वार किए।खून से लथपथ शव को जलावन घर में मकई के ढेर के नीचे छिपा दिया।अगले दिन पूनम रो-रोकर गांव में चिल्लाने लगी – “मेरी बेटी गायब हो गई… अपहरण हो गया!” नाटक इतना परफेक्ट था कि चौकीदार भगवान कुमार पासवान ने अपहरण का केस दर्ज कर लिया। लेकिन 2 दिन बाद मकई के ढेर से दुर्गंध आने लगी… और सच सामने आ गया।स्पीडी ट्रायल हुआ। एडीजे-4 रवि कुमार की अदालत ने अपने 28 पेज के ऐतिहासिक फैसले में साफ लिखा कि“आरोपी ने मां शब्द को कलंकित किया है। यह अपराध ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ श्रेणी में आता है। आरोपी को फांसी के फंदे पर तब तक लटकाया जाए जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए।”साथ ही विभिन्न धाराओं में कुल 60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माने की राशि शिवानी के पिता चंदन को दी जाएगी।शिवानी की हत्या ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया था। कोर्ट का यह फैसला मां-बेटी के रिश्ते पर कलंक लगाने वालों के लिए कड़ा संदेश है।प्रेमी रूपेश कुमार सिंह अभी भी फरार है शिवानी की एक गलती थी – उसने सच देख लिया था।और उसकी सजा उससे मिली – मौत।
रिपोर्ट
अंकित शेखावत
