सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किताब लिखने और प्रकाशित कराने को लेकर केंद्र सरकार सख्त नियम लाने पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक प्रस्ताव है कि रिटायर अफसर अपनी सेवा से जुड़े अनुभवों या संवेदनशील मामलों पर आधारित पुस्तक 20 साल तक प्रकाशित नहीं करा सकेंगे। इस संभावित आदेश को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई हैयह बहस तब और बढ़ी जब पूर्व थलसेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब Four Stars of Destiny को लेकर विवाद खड़ा हो गया। बताया गया कि किताब में सेना की रणनीति, सीमावर्ती हालात और कुछ अहम फैसलों का उल्लेख है। पुस्तक आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई थी,

लेकिन उसके कुछ अंश सार्वजनिक होने के दावे सामने आए, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गईसरकारी सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में गोपनीयता सर्वोपरि होती है। कई बार सेवानिवृत्ति के बाद अधिकारी अपने अनुभव साझा करते हैं, लेकिन यदि उनमें संवेदनशील जानकारियां हों तो इससे सुरक्षा तंत्र प्रभावित हो सकता है इसी को ध्यान में रखते हुए कूलिंग ऑफ पीरियड” लागू करने पर विचार हो रहा है, ताकि तत्कालीन घटनाओं या रणनीतिक सूचनाओं के सार्वजनिक होने का जोखिम कम किया जा सके हालांकि विपक्षी दलों और कुछ पूर्व अधिकारियों का मानना है कि ऐसा कदम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश के रूप में देखा जा सकता है उनका तर्क है कि आत्मकथाएं और संस्मरण इतिहास का महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं, जिनसे आने वाली पीढ़ियों को नीति और निर्णय प्रक्रिया को समझने में मदद मिलती है।

यदि 20 साल का प्रतिबंध लगाया गया तो यह अत्यधिक कठोर प्रावधान माना जाएगाकानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पहले से ही रक्षा और खुफिया से जुड़े अधिकारियों पर आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम सहित कई नियम लागू हैं ऐसे में नया आदेश लाने से पहले स्पष्ट दिशानिर्देश तय करना जरूरी होगा—जैसे किन विषयों पर रोक होगी, पांडुलिपि की पूर्व अनुमति कैसे ली जाएगी और उल्लंघन पर क्या कार्रवाई होगी फिलहाल सरकार की ओर से अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन नरवणे की किताब को लेकर उठे विवाद ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है आने वाले दिनों में यह साफ हो सकेगा कि प्रस्तावित 20 साल की शर्त महज चर्चा तक सीमित रहती है या इसे औपचारिक नियम का रूप दिया जाता है
