केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठ के मुद्दे पर बड़ा और सख्त बयान देते हुए कहा है कि जिस तरह असम में घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई की गई, उसी मॉडल को पूरे देश में लागू किया जाएगा देश की सुरक्षा और नागरिकों के अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और अवैध रूप से भारत में रह रहे घुसपैठियों के खिलाफ निर्णायक कदम उठाए जाएंगेअमित शाह ने यह बयान एक कार्यक्रम के दौरान दिया, जहां उन्होंने असम के ऐतिहासिक योगदान और स्वतंत्रता सेनानी गोपीनाथ बोरदोलोई की भूमिका का भी विस्तार से जिक्र किया शाह ने कहा कि अगर गोपीनाथ बोरदोलोई का दृढ़ संकल्प और साहस नहीं होता, तो आज असम भारत का हिस्सा नहीं होता, बोरदोलोई ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को मजबूर किया कि असम को भारत में बनाए रखा जाए घुसपैठ केवल एक राज्य या क्षेत्र की समस्या नहीं है,

बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, जनसंख्या संतुलन और सामाजिक ताने-बाने से जुड़ा गंभीर मुद्दा है असम में एनआरसी, सीमा सुरक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए अवैध घुसपैठ पर नियंत्रण की दिशा में अहम कदम उठाए गए हैं अब इसी तरह की सख्ती पूरे देश में देखने को मिलेगा सरकार का उद्देश्य किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि देश के कानून का पालन कराना और भारत के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है जो लोग अवैध रूप से देश में रह रहे हैं, उन्हें कानून के तहत बाहर किया जाएगा असम के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर भी प्रकाश डाला आजादी के समय देश के बंटवारे के दौर में असम को लेकर गंभीर आशंकाएं थीं उस समय गोपीनाथ बोरदोलोई ने न सिर्फ असम के लोगों की आवाज को बुलंद किया,

बल्कि राजनीतिक दबाव बनाकर यह सुनिश्चित किया कि असम भारत का अभिन्न हिस्सा बना रहे गोपीनाथ बोरदोलोई का योगदान केवल असम तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने भारत की एकता और अखंडता को मजबूत करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को जानें और उनसे प्रेरणा लेंराजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है कुछ राजनीतिक दल वोट बैंक की राजनीति के लिए घुसपैठ जैसे संवेदनशील मुद्दे पर आंखें मूंद लेते हैं लेकिन मौजूदा सरकार देशहित में कड़े फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगी यह बयान आने वाले समय में देशभर में घुसपैठ के खिलाफ और सख्त नीतियों की ओर इशारा करता है।सीमा सुरक्षा, पहचान सत्यापन और कानूनी प्रक्रियाओं को और मजबूत किया जा सकता है फिलहाल, गृह मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है जहां समर्थक इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं विपक्ष की ओर से इस पर प्रतिक्रिया आने की संभावना है
