ढाका/कोलकाता: बांग्लादेश की अंतर्राष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में गैर मौजूदगी में मौत की सजा सुनाई है। यह ऐतिहासिक फैसला उस समय आया जब हसीना विदेश में हैं और राजनीतिक तनाव चरम पर है।न्यायाधीश गोलम मोर्तुज़ा मोज़ुम्दर ने ट्रिब्यूनल में सुनवाई के दौरान तीन गंभीर आरोपों पर हसीना को दोषी ठहराया गया है 1. उकसाना – लोगों को हिंसा के लिए भड़काना।2. हत्या के आदेश देना – प्रदर्शनकारियों और विरोधियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई का आदेश देना।3. जन सुरक्षा में विफलता – नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में लापरवाही।ट्रिब्यूनल ने कहा कि “कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।” सरकार का यह भी कहना है कि इस फैसले से बांग्लादेश में न्याय और कानून का राज सुनिश्चित होगा।शेख हसीना ने इस फैसले को पूर्वनिर्धारित और पक्षपाती करार दिया है। उनका कहना है कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया में खुद को बचाने का पूरा अवसर नहीं मिला। हसीना ने आरोप लगाया कि ट्रिब्यूनल राजनीतिक प्रेरणा से संचालित है और यह एक अस्थायी गुट द्वारा स्थापित किया गया था, जिसका कोई लोकतांत्रिक आधार नहीं है।उन्होंने बयान में कहा कि “यह फैसला मेरी पार्टी और समर्थकों को डराने का प्रयास है। मैं न्याय के लिए हर संभव कानूनी रास्ता अपनाऊंगी।”मुख्य सलाहकार मुहम्मद युनुस ने इस फैसले की सराहना करते हुए कहा है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। यह फैसला यह संदेश देता है कि सत्ता परिवर्तन के बाद भी न्याय लागू रहेगा।”सरकार ने यह भी साफ किया है कि हसीना को ढाका वापस लाना प्राथमिकता है, लेकिन इसके लिए उन्हें कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रिया का पालन करना होगा।
