अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर अपने बयानों से वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है ट्रम्प ने दावा किया है कि उन्होंने महज 10 महीनों के भीतर भारत-पाकिस्तान समेत दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे 8 बड़े युद्ध और संघर्ष रुकवाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कोशिशों से दुनिया को न्यूक्लियर वॉर जैसी भयावह स्थिति से बचाया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया गया, जो उनके मुताबिक अनुचित हैएक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प ने कहा कि उनके नेतृत्व में अमेरिका ने कूटनीति के जरिए कई बड़े टकरावों को बढ़ने से रोका उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच हालात बेहद संवेदनशील थे और अगर समय रहते हस्तक्षेप नहीं होता तो स्थिति खतरनाक मोड़ ले सकती थी उनके प्रयासों ने हालात को नियंत्रण में लाने में मदद कीट्रम्प ने अपने बयान में यह भी कहा कि दुनिया अक्सर युद्ध रोकने की कोशिशों को नजरअंदाज कर देती है,

जबकि युद्ध जीतने या शुरू करने वालों को ज्यादा चर्चा मिलती है मैंने युद्ध शुरू नहीं किए, बल्कि उन्हें खत्म करवाया फिर भी मुझे वह सम्मान नहीं मिला, जिसका मैं हकदार था ट्रम्प ने इशारों-इशारों में कहा कि नोबेल शांति पुरस्कार राजनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर दिए जाते हैं, न कि वास्तविक योगदान को देखकर , राष्ट्रपति ने दावा किया कि उनके कार्यकाल के दौरान मध्य पूर्व, एशिया और अन्य क्षेत्रों में कई बड़े संघर्ष ऐसे थे, जो परमाणु युद्ध में तब्दील हो सकते थे अगर समय रहते कूटनीतिक दबाव और संवाद नहीं किया जाता, तो हालात पूरी दुनिया के लिए खतरनाक हो सकते थे उन्होंने हमेशा अमेरिका फर्स्ट की नीति के साथ-साथ वैश्विक शांति को भी प्राथमिकता दीहालांकि ट्रम्प के इन दावों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं कुछ समर्थकों का कहना है कि ट्रम्प ने अपने कार्यकाल में सीधे युद्ध में शामिल होने से बचते हुए कूटनीति पर जोर दिया, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है वहीं आलोचकों का कहना है कि ट्रम्प अक्सर उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं और उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है

भारत-पाकिस्तान संबंधों के संदर्भ में भी विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होने या बढ़ने में कई कारक जिम्मेदार होते हैं, जिनमें क्षेत्रीय राजनीति, आंतरिक हालात और अंतरराष्ट्रीय दबाव शामिल हैं ऐसे में किसी एक नेता को पूरा श्रेय देना जटिल मुद्दा हैनोबेल शांति पुरस्कार को लेकर ट्रम्प पहले भी अपनी नाराजगी जता चुके हैं उन्होंने पूर्व में भी कहा था कि अगर वही काम किसी और नेता ने किया होता, तो उसे तुरंत नोबेल मिल जाता उनके इस बयान को आगामी राजनीतिक रणनीति और अपने समर्थकों को संदेश देने के तौर पर भी देखा जा रहा है डोनाल्ड ट्रम्प का यह दावा एक बार फिर उन्हें वैश्विक सुर्खियों में ले आया है युद्ध रोकने और शांति स्थापित करने को लेकर उनके बयान जहां उनके समर्थकों में उत्साह पैदा कर रहे हैं, वहीं आलोचक इसे आत्मप्रचार बता रहे हैं आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और राजनीतिक विश्लेषक उनके इन दावों को किस नजर से देखते हैं
