विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बांग्लादेश में आयोजित बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार के दौरान पाकिस्तानी संसद के स्पीकर से औपचारिक रूप से हाथ मिलाया इस घटना की तस्वीर सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर तेजी से वायरल हो रही है और राजनीतिक व कूटनीतिक में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है इस शोक समारोह में कई देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे, और इस दौरान जयशंकर और पाक स्पीकर के बीच यह संक्षिप्त अभिवादन हुआ है यह हाथ मिलाना पूरी तरह कूटनीतिक प्रोटोकॉल का हिस्सा था अंतरराष्ट्रीय शोक सभा में मौजूद नेताओं के बीच औपचारिक अभिवादन आम प्रथा मानी जाती है हालांकि, हालिया घटनाओं को देखते हुए इस तस्वीर को लेकर बहस शुरू हो गई है दरअसलnऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाक रिश्तों में तनाव देखा गया था और क्रिकेट के मैदान पर दोनों देशों के खिलाड़ियों ने एक-दूसरे से हाथ तक नहीं मिलाया था ऐसे में यह कूटनीतिक मुलाकात और हाथ मिलाने का क्षण प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है

खेल और डिप्लोमेसी में खेल के मैदान पर भावनाएं और संदेश सीधे होते हैं क्रिकेट या अन्य खेलों में विरोधियों के बीच हाथ न मिलाना विरोध या नाराजगी का संदेश होता है वहीं डिप्लोमेसी में भाषा, व्यवहार और शिष्टाचार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं शोक सभा जैसी अंतरराष्ट्रीय औपचारिकताओं में नेताओं के बीच हाथ मिलाना परंपरा का हिस्सा है और इसे किसी नीति बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिएविदेश मंत्रालय के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि यह कदम पूरी तरह औपचारिक था और भारत की पाकिस्तान नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है मंत्रालय ने कहा कि ऐसे शोक समारोहों और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में यह सामान्य प्रोटोकॉल होता है, और इसे भावनात्मक या राजनीतिक संदेश से जोड़ना उचित नहीं होगासोशल मीडिया पर इस तस्वीर को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं

कुछ लोग इसे सकारात्मक संकेत मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे हालिया तनाव के संदर्भ में प्रश्नों के घेरे में रख रहे हैं यह औपचारिक हाथ मिलाना भारत-पाक डिप्लोमेसी में शिष्टाचार और परंपरा का प्रतीक है, न कि किसी नरमी का संकेत ,शोक सभाओं में औपचारिक मुलाकातें और अभिवादन एक अंतरराष्ट्रीय परंपरा है ऐसे मौकों पर नेताओं का व्यवहार कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने का जरिया होता है जयशंकर का यह हाथ मिलाना भी इसी परंपरा का हिस्सा था, और इसे डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल के तहत देखा जा रहा है खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में जयशंकर-पाक स्पीकर का यह हाथ मिलाना एक औपचारिक क्षण था, लेकिन मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक माहौल में इसे काफी ध्यान और चर्चा मिली इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि खेल, राजनीति और कूटनीति अलग-अलग मंच हैं और हर मंच पर संदेश देने के तरीके अलग होते हैं
