ईरान में जारी राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के बीच एक ऐसा नारा फिर से सुनाई देने लगा है। जिसे कभी बोलना भी वहां गुनाह माना जाता था।शाह अमर रहे यह वही नारा है, जिसे 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान में पूरी तरह दबा दिया गया था दशकों तक ईरानी समाज में इस नारे को लेना न सिर्फ वर्जित था, बल्कि इसे सत्ता के खिलाफ सीधी बगावत माना जाता था लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं और यही नारा ईरान में इंकलाब की नई आवाज बनकर उभर रहा है दरअसल, ईरान में मौजूदा शासन व्यवस्था के खिलाफ जनता का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है महंगाई, बेरोजगारी, सख्त धार्मिक नियम, महिलाओं पर पाबंदियां और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर रोक जैसे मुद्दों ने आम लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है इन्हीं प्रदर्शनों के दौरान कई जगहों पर लोग खुलेआम शाह अमर रहे।के नारे लगाते नजर आए, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है

ईरान में शाह मोहम्मद रजा पहलवी के शासन को खत्म हुए करीब चार दशक से ज्यादा का वक्त बीत चुका है इस्लामिक क्रांति के बाद नए शासन ने शाह के नाम और उनकी विचारधारा को मिटाने की पूरी कोशिश की स्कूलों, मीडिया और सार्वजनिक जीवन से शाह समर्थक सोच को खत्म कर दिया गया ऐसे में आज उसी नारे का दोबारा गूंजना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि ईरानी समाज के एक बड़े हिस्से में मौजूदा सिस्टम के प्रति गहरी नाराजगी है शाह अमर रहे’ का नारा सिर्फ राजशाही की वापसी की मांग नहीं है, बल्कि यह मौजूदा सत्ता के खिलाफ असंतोष और विरोध का प्रतीक बन चुका है लोगों के लिए यह नारा एक ऐसे दौर की याद दिलाता है, जिसे वे आज की सख्ती और दमन की तुलना में ज्यादा आज़ाद मानते हैं

खासकर युवा वर्ग, जो इस्लामिक क्रांति के बाद पैदा हुआ, अब खुले तौर पर सिस्टम को चुनौती देता नजर आ रहा है हालांकि ईरानी सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इन नारों को दबाने की कोशिश कर रही हैं कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की खबरें भी सामने आई हैं।सरकारी मीडिया इन नारों को विदेशी साजिश और भ्रम फैलाने की कोशिश बता रहा है इसके बावजूद इसके, सड़कों पर उठती आवाजें यह संकेत दे रही हैं कि जनता का डर धीरे-धीरे टूट रहा है शाह अमर रहे।का दोबारा उभरना ईरान की राजनीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है यह नारा अब इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ इंकलाब की आवाज बनता जा रहा है आने वाले समय में यह विरोध किस दिशा में जाएगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इतना साफ है कि ईरान में सन्नाटा टूट चुका है
