
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दोनों चरणों की वोटिंग पूरी हो चुकी है।पहले चरण में 6 नवंबर को 121 सीटों पर और दूसरे चरण में 11 नवंबर को 122 सीटों पर मतदान हुआ।राज्य के लगभग सभी जिलों में भारी सुरक्षा व्यवस्था और मतदाताओं के उत्साह के बीच वोटिंग शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।–
–📊 NDA को स्पष्ट बढ़त, महागठबंधन पिछड़ता नजर आ रहादैनिक भास्कर रिपोर्टर्स पोल के अनुसार, बिहार में इस बार भी सत्ता की बागडोर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के हाथों में जाती नजर आ रही है।रिपोर्ट के मुताबिक —NDA: 138–156 सीटों के बीचमहागठबंधन: 73–91 सीटों के बीचअन्य दल: 5–8 सीटों के बीचइस बार का मुकाबला दिलचस्प जरूर रहा, लेकिन NDA ने ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी बेल्ट तक अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी है।—
🧩 जन सुराज और AIMIM का प्रदर्शनप्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज पहली बार विधानसभा चुनाव में अपना भाग्य आजमा रही है।रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के उम्मीदवार 3 सीटों पर कड़े मुकाबले में हैं और पहली बार खाता खुलने की संभावना बन रही है।वहीं, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM पिछली बार की तुलना में कमजोर स्थिति में है और सिर्फ एक सीट पर सिमटती नजर आ रही है।—
⚖️ RJD–कांग्रेस गठबंधन को झटका, सहनी की मुश्किलेंमहागठबंधन को इस बार बड़ा नुकसान होता दिख रहा है।राजद–कांग्रेस गठबंधन की कई परंपरागत सीटों पर इस बार NDA उम्मीदवारों ने मजबूत बढ़त बनाई है।महागठबंधन के डिप्टी CM कैंडिडेट मुकेश सहनी का खाता खुलना भी मुश्किल नजर आ रहा है, जिससे विपक्षी खेमे में चिंता बढ़ी है।—
🔥 बड़ी सीटों पर कड़ा मुकाबला, कई जगह उलटफेर के संकेतकई हाई-प्रोफाइल सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प बना हुआ है।लखीसराय: डिप्टी CM विजय सिन्हा को कड़ी टक्करअलीनगर: BJP प्रत्याशी मैथिली ठाकुर और RJD उम्मीदवार के बीच कांटे की टक्करमहुआ: तेजप्रताप यादव की सीट पर अप्रत्याशित मुकाबलादानापुर: केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव की सीट पर रुझान बदलते हुएतारापुर: सम्राट चौधरी की सीट पर भी सस्पेंस बना हुआ है
🧭 मतदाताओं का रुझान: युवा और महिला वोटर निर्णायकइस बार बिहार चुनाव में महिलाओं और युवाओं का मतदान प्रतिशत पहले से अधिक रहा है।राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं का झुकाव NDA की ओर और युवाओं का जन सुराज या स्वतंत्र उम्मीदवारों की ओर ज्यादा देखा गया।—🕒 आगे क्या?अब सबकी निगाहें मतगणना की तारीख पर टिकी हैं।12 घंटे से अधिक की काउंटिंग में इस बार कई सीटों पर नजदीकी मुकाबले की उम्मीद है।वोटिंग प्रतिशत और सामाजिक समीकरणों को देखकर विशेषज्ञ मान रहे हैं कि नीतीश कुमार एक बार फिर सत्ता के समीकरण में निर्णायक भूमिका में रहेंगे।
