बिहार की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजप्रताप यादव के पारंपरिक दही-चूड़ा भोज में पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पहुंचे लालू यादव की मौजूदगी ने कार्यक्रम को खास बना दिया इस दौरान लालू ने बेटे तेजप्रताप को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वह हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे कार्यक्रम में राज्यपाल और मामा प्रभुनाथ सिंह की मौजूदगी ने सियासी संदेशों को और गहरा कर दिया, जबकि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही हर साल मकर संक्रांति के मौके पर आयोजित होने वाला दही-चूड़ा भोज बिहार की राजनीति में सिर्फ एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन और राजनीतिक संकेतों का मंच माना जाता है इस बार भी तेजप्रताप यादव के भोज में बड़ी संख्या में समर्थक, पार्टी कार्यकर्ता और नेता पहुंचे भोज स्थल पर पारंपरिक व्यंजनों के साथ-साथ राजनीतिक चर्चाओं का दौर चलता रहा कार्यक्रम के दौरान लालू प्रसाद यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि तेजप्रताप उनके बेटे हैं और उन्हें उनका पूरा आशीर्वाद हमेशा मिलता रहेगा लालू के इस बयान को तेजप्रताप के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है

हाल के दिनों में पार्टी और परिवार के भीतर चल रही चर्चाओं के बीच लालू का यह संदेश राजनीतिक तौर पर अहम माना जा रहा है भोज में बिहार के राज्यपाल की मौजूदगी ने भी सभी का ध्यान खींचा आम तौर पर ऐसे कार्यक्रमों में संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की भागीदारी कम देखने को मिलती है, लेकिन इस आयोजन में राज्यपाल का आना इसे और खास बना गया इसके अलावा तेजप्रताप के मामा और बाहुबली नेता प्रभुनाथ सिंह भी कार्यक्रम में शामिल हुए प्रभुनाथ सिंह की मौजूदगी से भोज का राजनीतिक कद और बढ़ गया हालांकि, इस पूरे आयोजन में सबसे ज्यादा चर्चा तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी की गैरमौजूदगी को लेकर रही दोनों का कार्यक्रम में न आना सियासी गलियारों में कई सवाल खड़े कर रहा है विपक्षी दलों के नेताओं ने इसे RJD के भीतर चल रहे अंदरूनी मतभेदों से जोड़कर देखा, जबकि पार्टी समर्थकों का कहना है कि यह केवल निजी व्यस्तता का मामला हो सकता हैतेजप्रताप यादव ने अपने संबोधन में कहा कि दही-चूड़ा भोज सिर्फ एक परंपरा नहीं,

बल्कि जनता और कार्यकर्ताओं से जुड़ने का माध्यम है उन्होंने कहा कि बिहार की जनता के साथ उनका रिश्ता मजबूत है और आगे भी वे जनता की आवाज उठाते रहेंगे तेजप्रताप ने किसी भी तरह के विवाद या अंदरूनी मतभेदों पर खुलकर टिप्पणी करने से बचते हुए सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की, इस भोज के जरिए तेजप्रताप यादव ने यह दिखाने की कोशिश की है कि पार्टी और परिवार में उनका महत्व बना हुआ है वहीं लालू यादव की मौजूदगी ने इस संदेश को और मजबूत किया है

दूसरी ओर, तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति ने यह भी साफ कर दिया कि RJD की अंदरूनी राजनीति में अभी कई सवाल अनसुलझे है तेजप्रताप यादव का दही-चूड़ा भोज एक सामाजिक आयोजन से कहीं ज्यादा राजनीतिक घटनाक्रम बन गया लालू यादव का आशीर्वाद, बड़े नेताओं की मौजूदगी और कुछ अहम चेहरों की गैरमौजूदगी—इन सबने मिलकर बिहार की राजनीति को एक नया मुद्दा दे दिया है, जिस पर आने वाले दिनों में चर्चाएं जारी रहने की संभावना है
