रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत का आगमन आज बेहद खास होंने जा रहा उनकी यात्रा की शुरुआत ही राष्ट्रपति भवन में भव्य और पारंपरिक स्वागत समारोह से हुई,यह समारोह 5 दिसंबर 2025 की सुबह राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित किया गया पुतिन 4 दिसंबर की शाम भारत पहुँचे थे और 5 दिसंबर को उनके राज्य स्वागत कार्यक्रम, राजघाट यात्रा और द्विपक्षीय वार्ताएँ तय थीं जहाँ उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई और भारतीय सेना की त्रि-सेवा टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर प्रस्तुत किया यह भारतीय सैन्य सम्मान का सर्वोच्च रूप है, जो केवल किसी राष्ट्राध्यक्ष के स्वागत में दिया जाता है इस समारोह ने भारत-रूस संबंधों की ऐतिहासिक गहराई को फिर एक बार दुनिया के सामने रखा है

सुबह राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में लाल कालीन बिछाया गया था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं स्वागत मंच पर मौजूद थे जैसे ही पुतिन पहुंचे, भारतीय बैंड ने रूस और भारत के राष्ट्रगान बजाए गए उसके बाद सेना की टुकड़ी ने उन्हें सलामी दी पुतिन ने परेड का निरीक्षण किया और सैनिकों को सम्मान में सिर झुकाकर अभिवादन किया पूरा परिसर तालियों की गूंज और सैन्य औपचारिकता से भरा हुआ था यह दौरा इसलिए भी बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध की स्थितियों के बीच भारत और रूस के रिश्तों पर नज़र रख रही है पुतिन की यह यात्रा दिखाती है कि भारत-रूस के संबंध केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि रक्षा, ऊर्जा, तकनीक, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं

उनके स्वागत के तुरंत बाद पुतिन का अगला कार्यक्रम राजघाट था, जहाँ उन्होंने महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की यह भारत के प्रति सम्मान और शांति के संदेश का प्रतीक माना जाता है इसके बाद पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हैदराबाद हाउस में अहम बैठकें तय हैं, जहाँ दोनों देश रक्षा उपकरणों, सैन्य तकनीक, तेल-ऊर्जा, व्यापार, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, अंतरिक्ष और साइबर सहयोग पर चर्चा करेंगे कई समझौतों पर हस्ताक्षर भी संभव हैं,

जिससे भारत-रूस साझेदारी को और मजबूत दिशा मिलेगी भारत ने इस दौरे को बेहद गरिमामय तरीके से प्रस्तुत किया है PM नरेंद्र मोदी खुद पुतिन को एयरपोर्ट पर रिसीव करने गए थे, जो एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत है इसका सीधा अर्थ यह है कि भारत रूस के साथ अपने ऐतिहासिक और भरोसेमंद संबंधों को विशेष प्राथमिकता देता है राष्ट्रपति भवन में दिया गया भव्य सम्मान न सिर्फ औपचारिकता थी, बल्कि दुनिया को एक संदेश था कि भारत और रूस दोनों देशों के बीच भरोसा, सम्मान और रणनीतिक सामंजस्य आज भी बहुत मजबूत है।
