ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच मानवाधिकार कार्यकर्ता गजेल शर्माहद का बयान सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस को और तेज कर दिया है गजेल शर्माहद ने साफ कहा है कि ईरान में हो रहे प्रोटेस्ट का मकसद सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि आज़ादी, इंसाफ और बुनियादी मानवाधिकार हैं यह आंदोलन किसी राजनीतिक कुर्सी के लिए नहीं, बल्कि उस डर और दमन के खिलाफ है, जिसमें ईरान की आम जनता वर्षों से जी रही हैगजेल शर्माहद का यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि उनके पिता जमशेद शर्माहद को ईरान सरकार ने फांसी दे दी थी पिता की फांसी के बाद भी गजेल ने बदले या सत्ता पलट की भाषा नहीं अपनाई, बल्कि आंदोलन को मानवीय मूल्यों और स्वतंत्रता से जोड़कर देखा हम किसी सरकार को हटाने के लिए सड़कों पर नहीं है। हम चाहते हैं कि लोग बिना डर के जी सकें, बोल सकें और अपने फैसले खुद ले सकें आज़ादी की लड़ाई है,

सत्ता की नहींगजेल शर्माहद ने एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान में जो कुछ हो रहा है, उसे केवल राजनीतिक नजरिए से देखना गलत है यह एक सामाजिक और मानवीय संघर्ष है प्रदर्शनकारी न तो किसी विदेशी ताकत के इशारे पर काम कर रहे हैं और न ही उनका मकसद किसी खास नेता या दल को सत्ता में लाना है यह आंदोलन उस व्यवस्था के खिलाफ है, जो लोगों की आवाज दबाती हैउन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान सरकार अक्सर विरोध प्रदर्शनों को सत्ता परिवर्तन की साजिश बताकर कुचलने की कोशिश करती है, ताकि दमन को ठहराया जा सके लेकिन हकीकत यह है कि लोग केवल सम्मान, सुरक्षा और स्वतंत्रता चाहते हैंपिता की फांसी का दर्दगजेल शर्माहद ने अपने पिता की फांसी को ईरान में न्याय व्यवस्था की क्रूरता का उदाहरण बताया उन्होंने कहा कि उनके पिता को निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं मिला और पूरी प्रक्रिया अपारदर्शी रही मेरे पिता अकेले नहीं हैं ईरान में ऐसे हजारों परिवार हैं, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है गजेल ने कहाउन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निजी दर्द के बावजूद वह आंदोलन को व्यक्तिगत बदले में बदलने नहीं देना चाहतीं अगर आंदोलन का मकसद बदला बन गया, तो यह उसी हिंसा को जन्म देगा, जिसके खिलाफ लोग खड़े हुए हैंईरान में हालात और आंदोलन की दिशाईरान में पिछले कुछ समय से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं इन प्रदर्शनों में महिलाएं, युवा और छात्र बड़ी संख्या में शामिल हैं इंटरनेट बंदी, गिरफ्तारियां और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बावजूद लोग सड़कों पर उतर रहे हैं मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

गजेल शर्माहद का मानना है कि आंदोलन की ताकत इसकी नैतिकता में है जब तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण और आज़ादी रहेंगे, तब तक उन्हें दुनिया का समर्थन मिलता रहेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह ईरानी जनता की आवाज सुने और इसे केवल भू-राजनीतिक नजरिए से न देखेअंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियागजेल के बयान के बाद कई मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनका समर्थन किया है ईरान में हो रहे विरोध को सत्ता परिवर्तन के फ्रेम में बांधना आसान है, लेकिन असल मुद्दा नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों का है. गजेल शर्माहद की बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह व्यक्तिगत पीड़ा के बावजूद आंदोलन को व्यापक और सकारात्मक दिशा देने की कोशिश कर रही हैं उनका संदेश साफ है यह लड़ाई किसी सिंहासन के लिए नहीं, बल्कि आज़ादी और इंसाफ के लिए हैकुल मिलाकर, गजेल शर्माहद का बयान ईरान आंदोलन को एक मानवीय चेहरा देता है यह दिखाता है कि विरोध केवल सत्ता के खिलाफ नहीं, बल्कि डर, दमन और अन्याय के खिलाफ है ईरान सरकार इस संदेश को कैसे लेती है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस आंदोलन पर क्या रुख अपनाता है
