पंजाब में किसानों ने अपने अधिकारों और मांगों को लेकर बड़ा आंदोलन करने का ऐलान किया है किसान मजदूर मोर्चा (KMM) ने स्पष्ट किया है कि 5 दिसंबर 2025 को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक लगभग 26–29 स्थानों पर रेलवे ट्रैक जाम किया जाएगा इस दौरान राज्य के 19 जिलों में रेलवे सेवा प्रभावित हो सकती है इस आंदोलन की वजह से रेलवे प्रशासन पहले ही अलर्ट मोड में आ गया है और यात्रियों को वैकल्पिक योजना बनाने की सलाह दी गई है किसानों का यह आंदोलन रेल (रोको आंदोलन )के नाम से जाना जा रहा है इसमें किसान रेलवे ट्रैक जाम कर दिए ताकि उनकी मांगों पर सरकार ध्यान दे यह आंदोलन शांतिपूर्ण लेकिन असरदार होगा, और इसमें किसानों ने सभी ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित करने की चेतावनी भी दी गई है किसान के इस आंदोलन के माध्यम से सरकार को यह संदेश देना चाहते हैं कि उनकी मांगों को अनदेखा नहीं किया जा सकता उन्होंने कहा है कि अगर उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई,

तो आंदोलन और तेज किया जाएगा किसान नेताओं ने पहले ही चेतावनी दी है कि अगर इस दौरान उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में और लंबे समय तक आंदोलन किया जा सकता है इस आंदोलन का प्रभाव पंजाब के 19 जिलों में पड़ेगा जिसमें से कुछ प्रमुख स्थान और जिले हैं

अमृतसर ,जालंधर,लुधियाना,पठानकोट,होशियापुर,फिरोजपुर,कपूरथला,पटियाला,संगरूर,बठिंडा,मोगा,रोपड़,फरीदकोट,मुक्तसर,मालेरकोटला,मनसा इन जिलों में कुल 26–29 जगहों पर किसानों द्वारा ट्रैक जाम किया जाएगा इससे ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित होगी और मालगाड़ियों की सप्लाई भी बाधित हो सकती हैरेलवे प्रशासन ने यात्रियों से आग्रह किया है कि वे अपनी यात्रा योजना पहले से बनाएं और वैकल्पिक साधनों का उपयोग करें (इस आंदोलन से प्रभावित लोग)
(i) रेलवे यात्री — ट्रेनों का समय बिगड़ सकता है या ट्रेनें रद्द हो सकती हैं
(ii)मालगाड़ी संचालन — सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है
(iii)आम जनता — जिनका रेलवे सेवा से रोज़मर्रा का जुड़ाव हैकिसानों ने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से किया जाएगा।(किसानों की मुख्य मांगें )

1. Electricity Amendment Bill 2025 को रद्द करना :-किसान इस बिल के खिलाफ हैं और मानते हैं कि यह उनके हितों के लिए हानिकारक होगा
2. प्री-पेड बिजली मीटर हटाने की मांग:-किसानों का कहना है कि प्री-पेड मीटर ग्रामीण घरों के लिए बोझ बनेगा और बिजली की खपत पर नियंत्रण मुश्किल हो जाएगा
3. सरकारी संपत्तियों की कथित जबरन बिक्री:-किसान इसे गलत मानते हैं और सार्वजनिक संपत्तियों की निजीकरण की निंदा कर रहे हैं
4. भविष्य में बड़े आंदोलन की चेतावनी:-अगर इन मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तो आंदोलन और बड़ा और लंबा किया जाएगा इस आंदोलन से स्पष्ट होता है कि किसान अपनी मांगों के प्रति गंभीर हैं और सरकार से संवाद चाहते हैं किसान रेलवे ट्रैक या रेलवे क्रॉसिंग पर धरना देगे इस प्रदर्शन के दौरान सभी कानूनी नियमों का पालन किया जाएगा यह आंदोलन शांतिपूर्ण है,

लेकिन इसका असर रेलवे ट्रेनों और माल ढुलाई दोनों पर पड़ेगा किसान चाहते हैं कि सरकार उनकी बिजली बिल, प्री-पेड मीटर और सार्वजनिक संपत्ति से संबंधित मांगों पर गंभीरता से विचार करे। अगर उनकी बात नहीं मानी गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप देने की चेतावनी भी किसान दे चुके हैं
