केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के तीन दिवसीय शुक्रवार से 60वी डीजीपी आईजी शुरू हुई है जिसमें प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी भी शनिवार और रविवार इसमें शामिल होगे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी देर शाम रायपुर आ गए है केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद क लेकर बड़ा और निर्णायक बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है

कि अगली डीजी कॉन्फ्रेंस से पहले देश से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा गृह मंत्रालय की ओर से सुरक्षा बलों के अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में अमित शाह ने इस बात को दोहराया कि केंद्र सरकार ने बीते 10 वर्षों में नक्सलवाद के खिलाफ ऐसी रणनीति अपनाई है, जिसने संगठन की कमर तोड़ दी है और अब यह देश के लिए कोई बड़ी चुनौती नहीं बचा है।अमित शाह ने कहा कि सुरक्षाबलों के संयुक्त अभियान राज्यों के साथ बेहतर समन्वय और सटीक खुफिया रणनीति के कारण नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। जहां एक समय देश के 126 जिलों में नक्सलवाद सक्रिय था, वहीं अब यह घटकर सिर्फ कुछ चुनिंदा इलाकों तक सिमट गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने नक्सलवाद को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में ही नहीं देखा बल्कि इसे विकास और सुरक्षादोनों की चुनौती माना है इसी वजह से समग्र रणनीति ने बड़ी सफलता दिलाई है।गृहमंत्री ने बताया कि नक्सलवाद को कमजोर करने में विकास योजनाओं ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सड़कें, बिजली, स्वास्थ्य सेवाएं, स्कूल, बैंकिंग सुविधाएं और मोबाइल टावर जैसे बुनियादी ढाँचे जब इन इलाकों तक पहुंचे तो नक्सली संगठनों की पकड़ अपने-आप कमजोर हो जाएगी अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में राज्यों ने केंद्र का पूरा सहयोग किया है छत्तीसगढ़, झारखंड, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, बिहार और मध्य प्रदेश की सरकारों ने लगातार अभियान चलाए है जिससे नक्सलियों को सुरक्षित ठिकाने नहीं मिल सके।उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित राज्यों में पुलिस की क्षमता बढ़ाने,

आधुनिक हथियार उपलब्ध कराने, ड्रोन सर्विलांस और खुफिया तकनीक बढ़ाने से अभियान और प्रभावी हुए है इस बयान के बाद आने वाली डीजी कॉन्फ्रेंस अब बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। उनका दावा है कि अगले सम्मेलन तक देश में नक्सलवाद एक इतिहास बन चुका होगा।उन्होंने कहा कि कॉन्फ्रेंस में हम नक्सलवाद के अंत का जश्न नहीं बल्कि एक नई शुरुआत का संकल्प लेंगे नक्सलवाद को खत्म करने में सबसे बड़ी भूमिका स्थानीय लोगों और जनजातीय समुदायों ने निभाई है। उन्होंने कहा कि लोग अब सुरक्षा बलों पर भरोसा कर रहे हैं और नक्सलियों की विचारधारा को अस्वीकार कर रहे हैं।जब जनता साथ आती है, तो कोई भी हिंसात्मक आंदोलन ज्यादा दिन नहीं टिकता।
रिपोर्ट
अमित कुमार
