मास्को, रूस -रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने अमेरिकी प्रतिनिधियों, जिनमें डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जैरेड कुश्नर और निवेशक स्टीव विटकोफ शामिल होके साथ में पाँच घंटे लंबी बैठक की इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यूक्रेन संकट के समाधान और शांति वार्ता पर चर्चा करना था हालांकि बैठक के बाद यह साफ हुआ कि डोनबास क्षेत्र के मुद्दे का समाधान किए बिना कोई स्थायी शांति संभव नहीं है और रूस ने जंग रोकने पर कोई तत्काल निर्णय नहीं लिया है

रूस की ओर से बैठक में राष्ट्रपति पुतिन और उनके सलाहकार भी इसमें मौजूद थे वही अमेरिकी प्रतिनिधि मंडल में ट्रम्प के दामाद जैरेड कुश्नर, निवेशक स्टीव विटकोफ, और अन्य मध्यस्थ शामिल थे कुश्नर ने इस बैठक में शांति वार्ता के संभावित रास्ते तलाशने और रूस के रुख को समझने की कोशिश की इस बैठक का स्वरूप अनौपचारिक था, लेकिन चर्चा काफी गहन और रणनीतिक स्तर की थी यह बैठक 3 दिसंबर 2025 को मास्को, रूस में आयोजित की गई बैठक लगभग पाँच घंटे तक चली इस लंबे समय तक चली बैठक से यह साफ होता है कि दोनों पक्षों ने गंभीरता से वार्ता की और शांति के लिए संभावित रास्तों पर विचार किया इस बैठक का मुख्य उद्देश्य था यूक्रेन में शांति स्थापित करने के उपाय तलाशना और डोनबास क्षेत्र के मुद्दों पर विचार-विमर्श करना पुतिन ने बैठक में साफ कहा कि डोनबास क्षेत्र को हासिल किए बिना कोई स्थायी शांति नहीं होगी और युद्ध रोकने के लिए अभी कोई तत्काल निर्णय नहीं लिया गया है पुतिन ने बैठक के दौरान दोहराया कि डोनबास मुद्दे का समाधान किए बिना शांति वार्ता सफल नहीं हो सकती युद्ध रोकने के लिए तत्काल निर्णय लेना फिलहाल मुश्किल है

पुतिन के इस रुख से यह स्पष्ट हो गया कि रूस की प्राथमिकता डोनबास और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण बनाए रखना है कुश्नर और अन्य अमेरिकी प्रतिनिधियों का मकसद था शांति वार्ता को आगे बढ़ाना, रूस के रुख को समझना और युद्ध को रोकने के लिए मध्यस्थता करना कुश्नर को विशेष रूप से मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है अमेरिका की कोशिश थी कि रूस से ऐसे संकेत मिलें,

जिससे यूक्रेन में शांति वार्ता संभव हो सके बैठक के बाद यह साफ हुआ कि कोई ठोस समझौता नहीं हुआ है इस बैठक का अंतरराष्ट्रीय महत्व बहुत बड़ा है यूक्रेन में संकट लगातार बढ़ रहा है और इसके वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव हैं मास्को में हुई यह बैठक यह दर्शाती है कि अमेरिका और रूस के बीच शांति वार्ता की संभावनाएं अभी भी जटिल हैं डोनबास के मुद्दे पर किसी भी समझौते के बिना युद्ध समाप्ति की संभावना बहुत कम है।
रिपोर्ट
अमित कुमार
