यह मामला उद्योगपति अनिल अंबानी से जुड़ा है, जो रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन हैं उनके खिलाफ कई बैंकों ने बड़े वित्तीय अनियमितताओं और कथित धोखाधड़ी को लेकर केस दर्ज किए हैं जिसमें से यह तीन प्रमुख बैंक इसमें शामिल है IDBI Bank, Bank of Baroda (BoB) और Indian Overseas Bank (IOB)—अंबानी की कंपनियों को फ्रॉड घोषित करने की प्रक्रिया में शामिल रहे है Bombay High Court ने IDBI और BoB के मामलों में अनिल अंबानी को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया इसका मतलब यह है कि इन दोनों बैंकों ने उनकी कंपनियों को जो फ्रॉड घोषित किया है, उस फैसले पर अभी भी रोक नहीं लगेगी हालाँकि, Indian Overseas Bank (IOB) के मामले में कोर्ट ने मोहलत दी है,

यानी उस केस की सुनवाई आगे बढ़ा दी गई और उस पर तत्काल कोई कठोर आदेश नहीं दिया गया है यह पूरा मामला Bombay High Court में हुआ, जब अंबानी की तीनों याचिकाओं पर सुनवाई की गई कोर्ट ने अगली तारीख 17 दिसंबर 2025 तय की है, जब बैंक और अंबानी पक्ष की दलीलों पर आगे सुनवाई होगीसुनवाई मुंबई स्थित बॉम्बे हाई कोर्ट में हुई, जहाँ तीनों बैंक फ्रॉड-डिक्लेरेशन मामलों को एक साथ सूचीबद्ध किया गया था ,तीनों बैंकों ने अपनी-अपनी जांच, लोन रिकवरी प्रक्रिया और एक फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर अंबानी की कंपनियों को फ्रॉड श्रेणी में डाल दिया था यह फोरेंसिक रिपोर्ट BDO India LLP ने बनाई थी लेकिन अनिल अंबानी ने अदालत में दलील दी है कि BDO India को उस रूप में मान्यता नहीं दी जानी चाहिए थी, क्योंकि यह RBI के नए Master Directions के तहत पंजीकृत ऑडिटर की श्रेणी में नहीं आता इसलिए BDO की रिपोर्ट आधारित फ्रॉड घोषणा कानूनी रूप से जो वैध नहीं है

हाई कोर्ट ने अंबानी की दलीलों को अभी के लिए स्वीकार नहीं किया और कहा कि पहले बैंकों का जवाब आना आवश्यक है अदालत ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे अपनी-अपनी विस्तृत प्रतिक्रियाएँ अगली सुनवाई से पहले दाखिल करेंIDBI और BoB के मामलों में अदालत ने कहा कि कोई अंतरिम स्टे या रोक लगाने का कारण नहीं दिखता IOB मामले में पहले से अंतरिम आदेश मौजूद था, इसलिए उस पर जल्दी निर्णय लेने की बजाय कोर्ट ने सुनवाई आगे बढ़ा दी यही वजह है कि उस केस में अंबानी को मोहलत मिली
रिपोर्ट
राजेश कुमार
