लखनऊ में आयोजित एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश समाज और मनुष्यता से जुड़े मूलभूत मुद्दों पर गहरी बातें कही है राष्ट्रपति ने जहाँ मानसिक शांति आत्ममंथन और आध्यात्मिक संतुलन पर बल दिया।वहीं मुख्यमंत्री योगी ने आदित्यनाथ और उसके मनोवैज्ञानिक कारणों पर सख्ती से अपनी बात रखे है

● राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संदेश राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बोलीं-मन में झांकना सीखेंराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि आज की दुनिया में लोग सिर्फ आगे बढ़ने की प्रतियोगिता में लगे हुए हैं। लेकिन असली विकास वह होता है जब इंसान खुद के भीतर झांककर अपनी कमियों अच्छाइयों और वास्तविक आवश्यकताओं को समझता है।उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जागरूकता केवल धार्मिक गतिविधियों का हिस्सा नहीं है बल्कि यह मनुष्य के संपूर्ण विकास का आधार है।राष्ट्रपति ने लोगों को प्रेरित करते हुए कहा कि मन की शांति और संतुलन तभी प्राप्त होता है, जब व्यक्ति बाहरी उपलब्धियों से पहले अपने आंतरिक संसार को समझने का प्रयास करे तेज़ी से बदलती दुनिया में मानसिक तनाव बढ़ रहा है। ऐसे समय में योग ध्यान और आत्मचिंतन ही वह साधन हैं, जो मनुष्य को संतुलित रखते हैं उन्होंने विशेष तौर पर युवाओं का बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी तकनीक और अवसरों के समुद्र में आगे बढ़ रही है, परंतु साथ ही तनाव क्रोध और हताशा से भी जूझ रही है यदि युवा अपने मन के भीतर दरारें पहचानें भावनाओं को समझें और अपनी सोच को सही दिशा दें, तो समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सृजनात्मकता बढ़ेगी।

● मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश — गलत मानसिकता आतंकी पैदा करती हैकार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आतंकवाद पर गहरी टिप्पणी की है उन्होंने कहा कि आतंकवाद कोई अचानक जन्म लेने वाली समस्या नहीं है। यह मन की गंदी विकृत और हिंसात्मक प्रवृत्तियों से पैदा होता है।जब किसी व्यक्ति का मन कट्टरता, नफरत और नकारात्मकता से भर जाता है, तो वह समाज और मानवता का शत्रु बन जाता है।योगी ने कहा कि आतंकवाद किसी भी धर्म का नहीं होता, यह केवल मानसिक विकृति है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिस सोच में हिंसा विनाश और निर्दोषों को नुकसान पहुंचाने की इच्छा हो वह मानसिकता कभी भी सभ्य समाज का हिस्सा नहीं हो सकती।लखनऊ में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक समारोह नहीं था बल्कि सामाजिक-आध्यात्मिक संतुलन पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने योग, ध्यान, मानसिक स्वास्थ्य और चरित्र निर्माण पर कई सत्रों में हिस्सा लिया।

राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत ही देश को विश्व में अलग पहचान देती है।कार्यक्रम का उद्देश्य भी यही था कि लोग मन की शांति और सामाजिक सौहार्द का महत्व समझें।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह भी कहा कि महिलाओं का मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास समाज के सामूहिक विकास का आधार है। उन्होंने कहा कि यदि परिवार की स्त्री शांत, जागरूक और मानसिक रूप से मजबूत हो, तो पूरा परिवार स्थिर और खुशहाल हो जाता है।मुख्यमंत्री ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि मानसिक विकृति और हिंसा से दूर रहकर ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।
रिपोर्ट
अमित कुमार
