रावलपिंडी की अडियाला जेल के बाहर पिछले चार दिनों से हवा में सिर्फ एक सवाल गूंज रहा है – इमरान खान जिंदा हैं भी या नहीं?

देश के सबसे लोकप्रिय नेता को आखिरी बार दुनिया ने मई 2024 में कोर्ट रूम में देखा था। उसके बाद से मानो धरती निगल गई हो। न परिवार से मुलाकात, न वकीलों से बात, न कोई ताजा फोटो, न वीडियो। सिर्फ सरकारी बयान कि “वो बिल्कुल ठीक हैं, डॉक्टर रोज चेक करते हैं।” लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं।

इमरान की बहनें – अलीमा खान, उज्मा खान और नूरीन नियाजी – जेल गेट पर डेरा डाले बैठी हैं। हाथों में तख्तियां, मुंह पर मास्क, आंखों में आंसू और गुस्सा। उनके साथ सैकड़ों PTI कार्यकर्ता। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर के काफिले को भी पुलिस ने रोका, धक्का-मुक्की की, लाठियां भांजी। वीडियो वायरल हैं।परिवार का दावा है कि पिछले डेढ़ महीने से इमरान को डेथ सेल में पूरी तरह अकेला रखा गया है। कोई फोन, कोई चिट्ठी, कोई मुलाकात नहीं। इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने दो-दो बार साफ आदेश दिए कि परिवार और वकील मिल सकते हैं, लेकिन जेल प्रशासन टस से मस नहीं हुआ। 26 नवंबर की रात सोशल मीडिया पर एक खबर आग की तरह फैली – “इमरान खान को जहर दे दिया गया।” बस फिर क्या था, लाहौर से कराची और पेशावर से क्वेटा तक सड़कें भर गईं। टायर जलने लगे, पुलिस पर पत्थर बरसने लगे। सरकार घबरा गई, जेल के आसपास धारा 144 लगा दी। अंदर की खबर रखने वाले सूत्रों का कहना है कि असल खेल आर्मी चीफ हाउस में चल रहा है। इमरान से मिलने की परमिशन का बटन अब रावलपिंडी में दबता है, इस्लामाबाद में नहीं। एक वरिष्ठ पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “ये सियासी कैद नहीं, सियासी बदला है।

इमरान की आवाज को पूरी तरह दबाने की कोशिश है। उनकी लोकप्रियता अभी भी आसमान छू रही है, ये बात मौजूदा सत्ता को हजम नहीं हो रही।”जेल प्रशासन ने एक छोटा-सा बयान जारी किया – “जनाब की सेहत एकदम दुरुस्त है, सभी सुविधाएं मुहैया हैं।” लेकिन जब पूछा गया कि फिर परिवार को मिलने क्यों नहीं देते, तो जवाब मिला – “सुरक्षा कारणों से फिलहाल किसी कैदी की मुलाकात नहीं हो रही।” यानी इमरान अकेले नहीं, सैकड़ों कैदी भी अपनी बीवियों-बच्चों से मिलने को तरस रहे हैं? ये दलील किसी को हजम नहीं हो रही।इमरान के वकील सलमान सफदर कहते हैं, “ये कोर्ट की अवमानना है। अगर सचमुच सब ठीक है, तो एक मिनट का वीडियो या पांच मिनट की मुलाकात से सरकार को क्या दिक्कत है?” पाकिस्तान के अंदर इस वक्त दो पाकिस्तान बन चुके हैं – एक वो जो टीवी पर सरकारी बयान सुनकर चुप है, और दूसरा वो जो सड़कों पर उतरकर चीख रहा है – “इमरान को जिंदा करके दिखाओ!”अगर कल को कुछ अनहोनी हुई, तो 9 मई 2023 की हिंसा लगने वाली है। देश एक बार फिर हिंसा के कगार पर खड़ा है। सवाल अभी भी वही है – इमरान खान हैं कहां ?
रिपोर्ट
अंकित शेखावत
