ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे परमाणु विवाद के बीच एक बार फिर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियान अमेरिका से संभावित बातचीत के लिए स्विट्जरलैंड पहुंच गए हैं। माना जा रहा है कि यह दौरा दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते को लेकर जारी गतिरोध को दूर करने की दिशा में अहम कदम हो सकता है दरअसल, 2015 में ईरान और विश्व शक्तियों के बीच हुआ परमाणु समझौता, जिसे आधिकारिक तौर पर Joint Comprehensive Plan of Action (JCPOA) कहा जाता है, पिछले कुछ वर्षों से विवादों में है अमेरिका ने 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में इस समझौते से खुद को अलग कर लिया था। इसके बाद ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में तनाव और बढ़ गया विशेषज्ञों का मानना है कि स्विट्जरलैंड में होने वाली यह वार्ता प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच भरोसा बहाल करने की कोशिश है स्विट्जरलैंड अक्सर दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है,

क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। ऐसे में जिनेवा जैसे शहर कूटनीतिक बातचीत के लिए सुरक्षित और तटस्थ मंच माने जाते हैंईरान का कहना है कि वह परमाणु कार्यक्रम को केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए चला रहा है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को आशंका है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। इसी मुद्दे को लेकर कई दौर की वार्ताएं पहले भी हो चुकी हैं, लेकिन ठोस समाधान अब तक सामने नहीं आ पाया है हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, इजराइल-ईरान संबंधों में खटास और क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है।

ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस ताजा कूटनीतिक पहल पर टिकी हुई हैं। यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो इससे वैश्विक तेल बाजार और पश्चिम एशिया की राजनीतिक स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दोनों देशों के लिए यह “टेस्ट ऑफ ट्रस्ट” जैसा मौका है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त निगरानी स्वीकार करे, वहीं ईरान आर्थिक प्रतिबंधों में राहत की मांग कर रहा है। इन दोनों मांगों के बीच संतुलन बनाना ही वार्ता की सबसे बड़ी चुनौती होगीफिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि स्विट्जरलैंड में होने वाली यह मुलाकात औपचारिक समझौते में बदलेगी या नहीं, लेकिन इतना तय है कि परमाणु मुद्दे पर एक बार फिर वैश्विक कूटनीति सक्रिय हो गई है। आने वाले दिनों में इस बातचीत के परिणाम पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी
