21वीं सदी में बदले की बात करना ठीक नहीं है राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल के इसी बयान ने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है इस टिप्पणी पर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती भड़क गईं और उन्होंने डोभाल के बयान को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला महबूबा का कहना है कि ऐसे बयान न सिर्फ संवेदनशील हालात को और जटिल बनाते हैं, बल्कि शांति और संवाद की संभावनाओं को भी कमजोर करते हैं दरअसल, अजित डोभाल ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर बात करते हुए कहा था कि 21वीं सदी में बदले की भावना से नहीं, बल्कि रणनीतिक सोच और दीर्घकालिक समाधान से आगे बढ़ने की जरूरत है डोभाल के इस बयान को कुछ लोग भारत की सुरक्षा नीति में परिपक्वता और आत्मविश्वास के संकेत के तौर पर देख रहे हैं, जबकि विपक्ष के एक वर्ग ने इसे अलग नजरिए से लिया महबूबा मुफ्ती ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब देश पहले से ही तनाव और अविश्वास के दौर से गुजर रहा है, तब ऐसे शब्दों का इस्तेमाल बेहद सोच-समझकर किया जाना चाहिए केंद्र सरकार और उसके शीर्ष पदों पर बैठे लोग कभी सख्ती तो कभी नरमी की बात कर भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं।

महबूबा ने कहा कि कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बदले या सख्ती की भाषा ने पहले भी हालात बिगाड़े हैंपीडीपी प्रमुख ने यह भी कहा कि अगर सच में 21वीं सदी की सोच अपनानी है तो सरकार को संवाद, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जनता के विश्वास को प्राथमिकता देनी चाहिए उनका कहना था कि सुरक्षा के नाम पर सिर्फ सैन्य या कठोर उपायों से स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सकताnमहबूबा ने केंद्र से अपील की कि वह जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक प्रक्रिया को बहाल करे और सभी पक्षों से बातचीत का रास्ता खोलेवहीं, डोभाल के बयान का समर्थन करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि उनके शब्दों को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है उनका तर्क है कि NSA का इशारा बदले की बजाय रणनीतिक संतुलन और राष्ट्रीय हितों की रक्षा की ओर था डोभाल यह स्पष्ट करना चाहते थे कि आधुनिक दौर में सुरक्षा चुनौतियों का जवाब भावनाओं से नहीं, बल्कि ठोस नीति और तकनीकी क्षमता से दिया जाना चाहिए

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महबूबा मुफ्ती की प्रतिक्रिया जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश भी हो सकती है केंद्र और क्षेत्रीय दलों के बीच लंबे समय से टकराव की स्थिति बनी हुई है, और ऐसे बयानों पर तीखी प्रतिक्रियाएं उसी का हिस्सा हैं हालांकि, यह भी सच है कि कश्मीर मुद्दे पर दिया गया हर बयान बेहद संवेदनशील माना जाता है और उसका व्यापक राजनीतिक असर पड़ता हैइस पूरे विवाद के बीच बीजेपी और सरकार समर्थक नेताओं ने महबूबा मुफ्ती पर पलटवार किया हैnमहबूबा मुफ्ती हर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बयान को राजनीतिक रंग देने की कोशिश करती हैं बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि विपक्ष जानबूझकर NSA के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है,

ताकि सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके अजित डोभाल के 21वीं सदी में बदले की बात वाले बयान ने एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा, कश्मीर नीति और राजनीतिक बयानबाजी को केंद्र में ला दिया है जहां एक ओर सरकार इसे परिपक्व और दूरदर्शी सोच बता रही है, वहीं विपक्ष इसे भ्रम पैदा करने वाला और संवेदनशील मुद्दों पर गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी करार दे रहा है आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह विवाद सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहता है या नीति और राजनीति पर इसका कोई ठोस असर भी पड़ता है
