प्रयागराज-प्रयागराज की गोल्ड मेडलिस्ट खुशबू निषाद की यह जीत सिर्फ खेल की जीत नहीं, बल्कि हौसले, संघर्ष और जज़्बे की कहानी बन गई है खुशबू ने बताया कि फाइट के दौरान उनके शरीर पर इतनी गंभीर चोटें थीं कि वह लगभग 95 प्रतिशत तक डैमेज हो चुकी थीं हाथ-पैर सुन्न पड़ने लगे थे, शरीर साथ नहीं दे रहा था और दिमाग में लगातार यही चल रहा था कि अब शायद उठ पाना भी मुश्किल है डॉक्टरों और कोच की नजर में भी वह फाइट हारने की कगार पर थीं उस वक्त उनकी सांसें तेज चल रही थीं और आंखों के सामने धुंध छा रही थी उन्हें लगा कि अगर अब खुद को संभाला नहीं, तो सब खत्म हो जाएगा तभी अचानक उनकी नजर अपनी कलाई पर पड़ी, जहां उन्होंने अपने पिता का नाम लिखवाया हुआ है उस नाम को देखते ही उन्हें जैसे नई जिंदगी मिल गई उन्हें अपने पिता का संघर्ष, उनका भरोसा और बचपन से मिली सीख याद आ गई कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों,

हार मानना मना है इसी एक पल ने खुशबू की सोच और फाइट का रुख पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने खुद से कहा कि अगर आज यहां हार गई, तो अपने परिवार, अपने शहर और अपने देश की उम्मीदों को कैसे पूरा कर पाएंगी इसके बाद उन्होंने दर्द को नजरअंदाज करते हुए पूरी ताकत झोंक दी। जिस फाइट में उनकी हार लगभग तय मानी जा रही थी, उसी फाइट को उन्होंने महज 10 सेकेंड के अंदर पलट दिया और गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया गोल्ड जीतते ही खुशबू की आंखों में आंसू थे उन्होंने कहा कि यह आंसू खुशी के थे, संघर्ष के थे और उस भरोसे के थे, जो उनके पिता ने हमेशा उन पर रखा खुशबू ने बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने कई सालों तक कड़ी मेहनत की है, कई बार चोटों से जूझना पड़ा, आर्थिक परेशानियां भी आईं, लेकिन परिवार ने कभी हिम्मत नहीं टूटने दीखुशबू की इस ऐतिहासिक जीत के बाद प्रयागराज में जश्न का माहौल है स्थानीय लोगों से लेकर खेल प्रेमियों तक, हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है

खेल जगत से जुड़े कई दिग्गजों ने खुशबू को बधाई दी और कहा कि ऐसी कहानियां आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनती हैं वही सोशल मीडिया पर भी खुशबू की जीत और उनके बयान तेजी से वायरल हो रहे हैं यह गोल्ड मेडल सिर्फ उनका नहीं, बल्कि हर उस खिलाड़ी का है, जो सीमित संसाधनों और कठिन हालातों में भी बड़े सपने देखता है आगे बढ़ना उनका लक्ष्य देश के लिए और बड़े टूर्नामेंट जीतना और भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और ऊंचा करना है खुशबू की यह जीत साबित करती है कि जब हौसला मजबूत हो, तो 95 प्रतिशत डैमेज भी जीत के रास्ते में रुकावट नहीं बन सकता
