देश के लिए ऐतिहासिक पल तब आया जब 125 साल बाद भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष भारत लौटाए गए इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में आयोजित विशेष एग्जीबिशन का उद्घाटन किया और कहा कि ये अवशेष हमारे लिए सिर्फ एंटीक पीस नहीं हैं, बल्कि हमारी संस्कृति, हमारी विरासत और हमारी पहचान का अभिन्न हिस्सा हैंप्रधानमंत्री मोदी ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि विश्व के अनेक देशों में फैले बुद्ध के अवशेष हमारे इतिहास का हिस्सा हैं हमारे लिए ये सिर्फ संग्रहणीय वस्तुएँ नहीं, बल्कि हमारी आत्मा और संस्कृति का हिस्सा हैं आज जब ये अवशेष लौट कर भारत आए हैं, तो हम गर्व महसूस कर रहे हैं इस एग्जीबिशन में देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए यह अवशेष 19वीं सदी के अंत में भारत से विदेश चले गए थे और अब 125 साल बाद भारत लौटकर हमारे हाथों में हैं प्रदर्शनी में इन अवशेषों के अलावा बुद्ध के जीवन और शिक्षाओं से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज़ और पेंटिंग्स भी प्रदर्शित किए गए हैं इस तरह की पहल से न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सकेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी अपने इतिहास और धार्मिक मूल्यों की गहरी समझ मिलेगी हमारे लिए ये अवशेष केवल एंटीक पीस नहीं हैं ये हमारी शिक्षा, हमारी शांति की परंपरा और हमारी सभ्यता की मिसाल हैं

यह एग्जीबिशन युवाओं के लिए भी बेहद प्रेरणादायक साबित होगा प्रदर्शनी में अवशेषों को अत्याधुनिक सुरक्षा और संरक्षण तकनीकों के तहत रखा गया है ताकि इन्हें आने वाले दशकों तक सुरक्षित रखा जा सके इसके अलावा, इसमें डिजिटल तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया है, जिससे दर्शक इन अवशेषों और उनसे जुड़ी जानकारी को वर्चुअली भी देख और समझ सकते हैं देश में बुद्ध के प्रति सम्मान और उनकी शिक्षाओं के महत्व को देखते हुए, सरकार ने इस पहल को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया है जब तक हम अपने इतिहास और संस्कृति के साथ जुड़े रहेंगे, तब तक हमारा समाज और हमारी पहचान मजबूत बनेगी विदेशों से लौटे इस अमूल्य खजाने को देखने के लिए जनता में भारी उत्सुकता और श्रद्धा दिखाई दी।

इस ऐतिहासिक पल ने यह स्पष्ट कर दिया कि हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत केवल इतिहास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आज के जीवन में भी हमारी पहचान, हमारी सोच और हमारी सभ्यता को आकार देती हैइस एग्जीबिशन के जरिए सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि इतिहास की रक्षा और संस्कृति का संरक्षण केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी भी है आने वाले समय में ऐसी और भी पहल की जाएंगी ताकि भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रख सके और उसे विश्व स्तर पर पहचान दिला सके
