ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने खतरनाक मोड़ ले लिया है सत्ता और जनता के बीच टकराव अब खुले दमन में बदलता नजर आ रहा है ईरानी सरकार ने सड़कों पर उतरकर विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए उन्हें खुदा का दुश्मन करार दिया है और फांसी तक की सजा की धमकी दी है हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब तक हिंसा में 217 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2600 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया हैसरकारी बयान में कहा गया है कि जो लोग देश की सुरक्षा, इस्लामी व्यवस्था और सर्वोच्च नेतृत्व के खिलाफ साजिश रच रहे हैं, वे इस्लामी कानून के तहत गंभीर अपराध के दोषी हैंnईरान के न्याय विभाग और सुरक्षा एजेंसियों ने साफ किया है कि फसाद फैलाने वालों के खिलाफ किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी सरकार ने आदेश दिए हैं कि गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों पर तेजी से मुकदमे चलाए जाएंगे और दोषी पाए जाने पर उन्हें फांसी की सजा दी जा सकती है

ईरान के कई बड़े शहरों—तेहरान, मशहद, इस्फहान, शिराज और तबरीज—में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच लगातार झड़पें हो रही हैं प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोलियां, आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल किया कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं, ताकि विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरें और वीडियो बाहर न जा सकें मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि मृतकों की संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा हो सकती है कई लोगों की मौत हिरासत में हुई है, लेकिन सरकार इसे छिपा रही है वहीं, ईरानी प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सुरक्षा बल केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने का काम कर रहे हैंसरकार की ओर से धार्मिक शब्दावली का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शनकारियों को खुदा का दुश्मन बताना हालात को और गंभीर बना रहा है ईरान के कानून में यह आरोप सबसे कठोर माना जाता है, जिसकी सजा अक्सर मौत होती है इस तरह की चेतावनियों का मकसद जनता में डर पैदा करना और आंदोलन को कुचलना है

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ईरान की कार्रवाई पर चिंता जताई जा रही है कई देशों और मानवाधिकार संगठनों ने ईरान से संयम बरतने और अभिव्यक्ति की आजादी का सम्मान करने की अपील की है हालांकि, ईरान सरकार ने इन बयानों को विदेशी हस्तक्षेप करार देते हुए सख्त लहजे में जवाब दिया ह।फिलहाल ईरान में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। फांसी की धमकी और लगातार हो रही गिरफ्तारियों के बावजूद सड़कों पर गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा सवाल यह है कि क्या सरकार सख्ती के जरिए आंदोलन को दबा पाएगी या यह विरोध और ज्यादा उग्र रूप लेगा आने वाले दिन ईरान के भविष्य के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं
