जोधपुर,सीकर,उदयपुर- राजस्थान में अरावली हिल्स के संरक्षण को लेकर आंदोलन तेज हो गया है सोमवार को जोधपुर, सीकर और उदयपुर सहित कई शहरों में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और पुलिस के साथ आमने-सामने हो गए इस आंदोलन का उद्देश्य अवैध निर्माण रोकना और अरावली की प्राकृतिक संपदा को बचाना बताया जा रहा है जोधपुर में पुलिस को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को खदेड़ना पड़ा, क्योंकि लोग प्रशासन और अधिकारियों के खिलाफ नाराजगी जता रहे थे भीड़ ने सड़कों पर जमकर प्रदर्शन किया और कुछ जगहों पर हल्की झड़पें भी हुईं

पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बल तैनात किया और प्रदर्शनकारियों को रास्ता देने के लिए हल्का बल प्रयोग कियासीकर में आंदोलन और भी सक्रिय दिखाई दिया हर्ष पर्वत पर सैकड़ों लोग चढ़कर अरावली हिल्स के संरक्षण की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पर्वत पर यह चढ़ाई शांतिपूर्ण और पर्यावरण संरक्षण की चेतना बढ़ाने वाली थी प्रशासन ने स्थिति पर निगरानी रखी और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा बल तैनात किए उदयपुर में प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर उतरकर प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाई पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार कर लिया स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि यह कदम जनता और संपत्ति की सुरक्षा के लिए जरूरी था

गिरफ्तारी के बाद भी प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन जारी रख रहे हैं अरावली की जमीन पर लगातार अवैध निर्माण और पर्यावरणीय नुकसान हो रहा है उनका कहना है कि अगर अरावली की सुरक्षा नहीं हुई, तो जल स्रोत, वनस्पति और स्थानीय पारिस्थितिकी को गंभीर खतरा होगा अरावली हिल्स राजस्थान और पूरे उत्तर भारत के लिए जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं आंदोलनकारियों का उद्देश्य प्रशासन को चेताना और अवैध निर्माण को रोकने के लिए दबाव बनाना है।राजनीतिक दलों और स्थानीय नेताओं ने भी इस आंदोलन की ओर ध्यान दिया है

कई नेताओं ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान दिए, वहीं कुछ ने प्रशासन से शांति बनाए रखने और संवाद के जरिए समाधान खोजने की अपील की पुलिस ने स्थिति पर लगातार नजर रख रही है उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी जाएगी, लेकिन कानून और सार्वजनिक सुरक्षा के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगीइस आंदोलन के कारण शहरों में सामान्य जीवन प्रभावित हुआ कई सड़कें जाम हुईं, स्थानीय बाजार और स्कूल कुछ समय के लिए बंद रहे और उम्मीद जताई जा रही है

कि स्थिति जल्द शांतिपूर्ण तरीके से नियंत्रित की जा सकेगीयह आंदोलन यह संदेश भी देता है कि पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के मुद्दे पर जनता अब और चुप नहीं रहने वाली है आने वाले दिनों में प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच संवाद और संतुलन स्थापित करने की दिशा में कदम उठाए जाने की संभावना है
