पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।एक प्रमुख बलूच नेता ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को आगाह करते हुए कहा है कि चीन आने वाले समय में बलूचिस्तान में अपनी सेना उतार सकता है इस चेतावनी के बाद चीन-पाकिस्तान-बलूचिस्तान त्रिकोण को लेकर नई बहस छिड़ गई है बलूच नेता का कहना है कि चीन, पाकिस्तान के साथ मिलकर बलूचिस्तान में अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की योजना बना रहा है खासतौर पर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को सुरक्षित रखने के लिए चीनी सेना की तैनाती की आशंका जताई जा रही है बलूच नेता ने दावा किया कि बलूचिस्तान में पहले से ही चीनी सुरक्षाकर्मी और सैन्य सलाहकार सक्रिय हैं, लेकिन अब हालात ऐसे बन रहे हैं कि चीन खुली सैन्य तैनाती कर सकता है बताया जा रहा है कि यह चेतावनी विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ एक बैठक या संवाद के दौरान दी गई,

जिसमें बलूचिस्तान की मौजूदा स्थिति, मानवाधिकार उल्लंघन और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा हुई पाकिस्तान सरकार बलूचिस्तान में जनता की आवाज दबाने में नाकाम रही है और अब वह चीन की ताकत के सहारे हालात को काबू में रखना चाहती है।बलूचिस्तान लंबे समय से विद्रोह, हिंसा और अलगाववादी आंदोलन का केंद्र रहा है स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा बलों द्वारा उनके साथ भेदभाव किया जाता है और प्राकृतिक संसाधनों का फायदा बाहरी ताकतों को दिया जा रहा है CPEC परियोजनाओं के चलते चीन की बढ़ती मौजूदगी को लेकर बलूच संगठनों में पहले से ही नाराजगी है कई बार चीनी इंजीनियरों और परियोजनाओं पर हमले भी हो चुके हैंविशेषज्ञों का मानना है कि अगर चीन वाकई बलूचिस्तान में अपनी सेना उतारता है, तो इससे क्षेत्र की भू-राजनीति और ज्यादा जटिल हो जाएगी यह कदम न सिर्फ पाकिस्तान की संप्रभुता पर सवाल खड़े करेगा,

बल्कि भारत और अन्य क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा चिंताओं को भी बढ़ा सकता है भारत पहले ही CPEC का विरोध करता रहा है, क्योंकि इसका एक हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता हैफिलहाल भारत सरकार की ओर से इस चेतावनी पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि रणनीतिक जानकारों का कहना है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है बलूच नेता की चेतावनी को दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते सैन्य और आर्थिक प्रभाव के एक और संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, बलूचिस्तान में चीनी सेना की संभावित तैनाती की आशंका ने क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को और संवेदनशील बना दिया है अब आने वाले समय में यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी चर्चा का विषय बन सकता है
