पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है रक्षा मंत्री ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि अमेरिका को उनके खिलाफ भी वही रवैया अपनाना चाहिए, जैसा उसने वेनेजुएला के राष्ट्रपति के मामले में दिखाया थाnमंत्री ने यहां तक कह दिया कि नेतन्याहू को किडनैप किया जाना चाहिए और उन्हें फिलिस्तीनियों का सबसे बड़ा दुश्मन करार दिया रक्षा मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब गाजा पट्टी में जारी संघर्ष को लेकर दुनियाभर में इजराइल की आलोचना बढ़ रही है पाकिस्तान लंबे समय से फिलिस्तीन का समर्थन करता रहा है और इजराइल के सैन्य अभियानों को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताता आया है ताजा बयान में पाक रक्षा मंत्री ने कहा कि इजराइली प्रधानमंत्री की नीतियों के कारण हजारों निर्दोष फिलिस्तीनियों की जान जा चुकी है और पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैली हुई हैउन्होंने अमेरिका पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि वॉशिंगटन दोहरे मापदंड अपना रहा है जब बात कुछ देशों या नेताओं की आती है तो अमेरिका कड़ा रुख अपनाता है, लेकिन इजराइल के मामले में आंखें मूंद लेता है उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने अतीत में वेनेजुएला जैसे देशों के नेताओं के खिलाफ सख्त कदम उठाए, प्रतिबंध लगाए और यहां तक कि सत्ता परिवर्तन की कोशिशें भी कीं, लेकिन नेतन्याहू के खिलाफ वह कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि नेतन्याहू की सरकार फिलिस्तीनियों पर अत्याचार कर रही है और उनकी नीतियां क्षेत्रीय शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं उनके अनुसार, गाजा और वेस्ट बैंक में हो रही हिंसा के लिए सीधे तौर पर इजराइली नेतृत्व जिम्मेदार है उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की कि इजराइल पर दबाव बनाया जाए ताकि वह सैन्य कार्रवाई रोके और फिलिस्तीन समस्या का राजनीतिक समाधान निकाला जा सके हालांकि, रक्षा मंत्री के “किडनैप” जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर आलोचना भी हो रही है अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की भाषा कूटनीतिक मर्यादाओं के खिलाफ है और इससे पाकिस्तान की स्थिति कमजोर हो सकती है कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान फिलिस्तीन मुद्दे पर अपनी घरेलू और क्षेत्रीय राजनीति को ध्यान में रखते हुए सख्त बयानबाजी कर रहा है इजराइल की ओर से इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि तेल अवीव इसे भड़काऊ और गैर-जिम्मेदाराना बयान के रूप में देखेगा अमेरिका भी आमतौर पर इस तरह के बयानों से दूरी बनाता है, क्योंकि वह इजराइल को अपना करीबी सहयोगी मानता है इसके बावजूद, हाल के महीनों में अमेरिका के भीतर भी गाजा में हो रही सैन्य कार्रवाई को लेकर बहस तेज हुई है

और कई मानवाधिकार संगठन इजराइल की आलोचना कर रहे हैंपाकिस्तान में सरकार समर्थक हलकों में इस बयान को फिलिस्तीन के पक्ष में मजबूत स्टैंड के तौर पर देखा जा रहा है वहीं विपक्षी दलों और कुछ विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान को भावनात्मक बयानों के बजाय अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ठोस कूटनीतिक पहल करनी चाहिएपाकिस्तानी रक्षा मंत्री का यह बयान इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष को लेकर पहले से संवेदनशील वैश्विक माहौल में और तीखापन ले आया है आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या इस बयान का कोई कूटनीतिक असर पड़ता है या यह सिर्फ बयानबाजी तक ही सीमित रहता है
