वेनेजुएला के राष्ट्रपति को अमेरिका द्वारा हिरासत में लिए जाने को लेकर अब कई चौंकाने वाले दावे सामने आ रहे हैं सुरक्षा और सैन्य सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि वेनेजुएला की कमजोर रक्षा व्यवस्था, रूसी एयर-डिफेंस सिस्टम की विफलता और सैनिकों की अपर्याप्त ट्रेनिंग के चलते अमेरिका को यह ऑपरेशन अंजाम देने में ज्यादा दिक्कत नहीं आई दावा है कि अत्याधुनिक मिसाइल लॉन्चर गोदामों में पड़े रहे और कई सैनिकों को इन्हें चलाने तक की पूरी जानकारी नहीं थी, वेनेजुएला ने बीते वर्षों में रूस से भारी मात्रा में सैन्य साजो-सामान खरीदा था इसमें एयर-डिफेंस सिस्टम, रडार, मिसाइल लॉन्चर और आधुनिक हथियार शामिल थे कागजों पर यह व्यवस्था देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पर्याप्त मानी जा रही थी, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट निकली जब अमेरिकी ऑपरेशन हुआ, तब यही सिस्टम किसी काम नहीं आए देश के कई एयर-डिफेंस यूनिट्स या तो तकनीकी खराबी से जूझ रहे थे या उन्हें पूरी तरह सक्रिय ही नहीं किया गया था कुछ जगहों पर रडार सिस्टम समय पर अलर्ट देने में नाकाम रहे,

जबकि कई मिसाइल लॉन्चर लंबे समय से इस्तेमाल में नहीं थे इससे अमेरिका को बिना बड़ी सैन्य टक्कर के अपने ऑपरेशन को अंजाम देने का मौका मिल गयासबसे गंभीर आरोप सैनिकों की ट्रेनिंग को लेकर लगाए जा रहे हैं बताया जा रहा है कि कई यूनिट्स को आधुनिक हथियारों की पूरी ट्रेनिंग नहीं दी गई थी कुछ सैनिकों को केवल बुनियादी जानकारी थी, जबकि जटिल सिस्टम को ऑपरेट करने के लिए जरूरी अभ्यास नहीं कराया गया नतीजा यह हुआ कि संकट के वक्त हथियार मौजूद होने के बावजूद उनका इस्तेमाल नहीं हो सकारूसी एयर-डिफेंस सिस्टम की विफलता भी इस पूरे घटनाक्रम का अहम पहलू मानी जा रही है दावा किया जा रहा है कि जिन सिस्टम्स को अमेरिकी हवाई या तकनीकी घुसपैठ रोकने के लिए तैनात किया गया था, वे या तो जाम कर दिए गए या समय रहते प्रतिक्रिया नहीं दे पाए इससे वेनेजुएला की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैंवेनेजुएला सरकार की ओर से इन आरोपों को लेकर आधिकारिक प्रतिक्रिया सीमित रही है सरकारी मीडिया ने इसे अमेरिका की साजिश और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है सरकार का कहना है कि राष्ट्रपति को निशाना बनाना देश की संप्रभुता पर सीधा हमला है

हालांकि, रक्षा व्यवस्था की कमजोरियों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया हैअंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटना ने नई बहस छेड़ दी है कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक राष्ट्रपति की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि भारी हथियार खरीदने के बावजूद अगर सैन्य तैयारी और ट्रेनिंग मजबूत न हो, तो कोई भी देश असुरक्षित रह सकता हैमध्य और दक्षिण अमेरिका के कई देशों ने इस घटनाक्रम पर चिंता जताई है कुछ देशों ने अमेरिका के कदम की आलोचना की है, जबकि कुछ इसे वेनेजुएला की आंतरिक कमजोरी का नतीजा बता रहे हैं वहीं रूस की ओर से भी अब तक कोई सख्त सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे उसके दिए गए हथियारों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैंविशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में यह मामला कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा सकता है वेनेजुएला की सैन्य रणनीति, रूस के हथियारों की प्रभावशीलता और अमेरिका की कार्रवाई—तीनों ही अब वैश्विक चर्चा का विषय बन चुके हैंकुल मिलाकर, राष्ट्रपति को उठाए जाने की यह घटना वेनेजुएला की रक्षा तैयारियों की पोल खोलती नजर आ रही है, जहां मिसाइलें गोदामों में रहीं और सुरक्षा तंत्र वक्त पर काम नहीं आ सका
