अरावली पहाड़ियों से जुड़े बहुचर्चित मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता में तीन जजों की पीठ इस मामले को सुनेगी, सुनवाई को लेकर न सिर्फ कानूनी हलकों में बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी खासा उत्साह और तनाव देखा जा रहा है अरावली क्षेत्र में खनन, निर्माण और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर दायर याचिकाओं पर कोर्ट का रुख भविष्य की दिशा तय कर सकता है सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह मामला अरावली पहाड़ियों के संरक्षण से जुड़ा है,

जिन्हें उत्तर भारत का ग्रीन बैरियर माना जाता है याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अरावली क्षेत्र में अवैध खनन, अनियंत्रित निर्माण और सरकारी ढिलाई के चलते पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा है इससे न सिर्फ जैव विविधता प्रभावित हुई है, बल्कि दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण और जल संकट भी गहराया है इस सुनवाई में कोर्ट से सख्त निर्देशों की उम्मीद की जा रही हैइधर, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के साथ ही सड़क पर सियासत भी तेज हो गई है विपक्षी दलों ने अरावली पहाड़ियों को बचाने के मुद्दे पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है कई शहरों में कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और सरकार पर पर्यावरण संरक्षण में विफल रहने का आरोप लगाया प्रदर्शनकारियों का कहना है

कि अरावली को नुकसान पहुंचना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैविपक्ष का आरोप है कि विकास के नाम पर अरावली क्षेत्र में नियमों की अनदेखी की गई और प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचाया गया वहीं, सत्तापक्ष का कहना है कि सरकार पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर है और सुप्रीम कोर्ट के हर निर्देश का पालन किया जाएगा राजनीतिक बयानबाजी के बीच आम जनता की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है,

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पर्यावरण संतुलन और विकास के बीच संतुलन बनाने पर जोर दे सकता है कोर्ट पहले भी अरावली क्षेत्र में खनन और निर्माण गतिविधियों पर सख्त टिप्पणियां कर चुका है आज की सुनवाई में अंतरिम आदेश या दिशा-निर्देश जारी होने की भी संभावना जताई जा रही है अरावली हिल्स केस को लेकर यह सुनवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसका असर नीतिगत फैसलों पर पड़ेगा यदि सुप्रीम कोर्ट सख्त रुख अपनाता है, तो इससे देशभर में पर्यावरण से जुड़े मामलों में एक मजबूत संदेश जाएगा फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही और बाहर हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है
