पोरबंदर से ओमान की यात्रा जल्द ही एक ऐसा जहाज समुद्र की लहरों पर रवाना होने वाला है, जो आधुनिक तकनीक नहीं बल्कि करीब 2000 साल पुरानी समुद्री परंपरा का जीवंत उदाहरण होगा यह जहाज न तो लोहे से बना है और न ही इसमें किसी तरह का इंजन लगाया गया है यह पूरी तरह लकड़ी के तख्तों और नारियल की रस्सियों से तैयार किया गया यह पारंपरिक पोत केवल हवा और समुद्री धाराओं के सहारे पोरबंदर से ओमान तक की लंबी यात्रा करेगाइस ऐतिहासिक जहाज को प्राचीन भारतीय समुद्री तकनीक के आधार पर तैयार किया गया है खास बात यह है कि इसमें एक भी लोहे की कील का इस्तेमाल नहीं किया गया है लकड़ी के मजबूत तख्तों को आपस में जोड़ने के लिए नारियल के रेशों से बनी रस्सियों का प्रयोग किया गया है, जैसा कि हजारों साल पहले भारत और अरब देशों के बीच होने वाले समुद्री व्यापार में किया जाता था यह परियोजना भारत और ओमान के बीच प्राचीन समुद्री व्यापारिक रिश्तों को समझने और दुनिया के सामने भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को उजागर करने का प्रयास है

इतिहासकारों का मानना है कि प्राचीन काल में भारत के व्यापारी इसी तरह के जहाजों के जरिए अरब सागर पार कर मसाले, कपड़े और अन्य वस्तुओं का व्यापार किया करते थे इस जहाज की यात्रा पूरी तरह प्राकृतिक शक्तियों पर निर्भर होगी इसमें न तो इंजन लगाया गया है और न ही किसी तरह की आधुनिक नेविगेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा दिशा और गति का निर्धारण हवा की दिशा, लहरों और पारंपरिक खगोलीय ज्ञान के आधार पर किया जाएगा यह प्रयोग यह साबित करने की कोशिश है

कि प्राचीन तकनीक आज भी समुद्र जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कारगर हो सकती हैइस अनोखे सफर को लेकर स्थानीय लोगों और समुद्री इतिहास में रुचि रखने वालों में खासा उत्साह देखा जा रहा है पोरबंदर से रवाना होने से पहले जहाज को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं एक टीम पूरे सफर के दौरान जहाज की स्थिति और सुरक्षा पर नजर रखेगी, ताकि यात्रा सुरक्षित तरीके से पूरी की जा सकेपरियोजना से जुड़े लोगों का कहना है कि यह केवल एक समुद्री यात्रा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम है ओमान पहुंचने के बाद इस जहाज को प्रदर्शनी के रूप में भी रखा जा सकता है, ताकि लोग प्राचीन समुद्री तकनीक को करीब से समझ सकें कुल मिलाकर, पोरबंदर से ओमान तक होने वाली यह यात्रा भारत की 2000 साल पुरानी समुद्री परंपरा को एक बार फिर जीवंत करने का प्रयास है, जो आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से जोड़ने का काम करेगी
