अफगानिस्तान में तालिबान ने एक बार फिर महिलाओं से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं पर सख्त पाबंदियां लगा दी हैं ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, तालिबान ने गर्भनिरोधक गोलियों और परिवार नियोजन से जुड़ी दवाओं पर रोक लगा दी है। कई इलाकों में तालिबान लड़ाके क्लीनिकों और मेडिकल स्टोर्स पर पहुंचकर चेतावनी दे रहे हैं और गर्भनिरोधक दवाओं को नष्ट कराया जा रहा है। इस फैसले से अफगान महिलाओं की सेहत पर गंभीर खतरा पैदा हो गया हैस्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि तालिबान के इस कदम के बाद महिलाओं को न सिर्फ गर्भनिरोधक साधन नहीं मिल पा रहे, बल्कि प्रेगनेंसी और मिसकैरेज के मामलों में भी जरूरी इलाज बाधित हो गया है।

कई अस्पतालों और हेल्थ सेंटर्स में डर का माहौल है, जहां डॉक्टर और नर्स खुलकर इलाज करने से कतरा रहे हैंस्थानीय सूत्रों के अनुसार, तालिबान का दावा है कि गर्भनिरोधक दवाएं “पश्चिमी साजिश” का हिस्सा हैं और इनका इस्तेमाल इस्लामी मूल्यों के खिलाफ है इसी सोच के तहत तालिबान ने स्वास्थ्य संस्थानों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे ऐसी दवाओं का वितरण तुरंत बंद करें आदेश न मानने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।महिला अधिकार संगठनों का कहना है कि इस फैसले का सबसे ज्यादा असर गरीब और ग्रामीण इलाकों की महिलाओं पर पड़ेगा अफगानिस्तान पहले ही मातृ मृत्यु दर के मामले में दुनिया के सबसे खराब देशों में शामिल है अब गर्भनिरोधक साधनों की कमी से अनचाही प्रेगनेंसी बढ़ने की आशंका है, जिससे महिलाओं की जान को और अधिक खतरा हो सकता हैडॉक्टरों का कहना है कि गर्भनिरोधक गोलियां सिर्फ परिवार नियोजन के लिए ही नहीं, बल्कि कई मेडिकल कारणों से भी दी जाती हैं हार्मोनल असंतुलन, अत्यधिक ब्लीडिंग और प्रेगनेंसी से जुड़ी जटिलताओं में इन दवाओं की अहम भूमिका होती है। लेकिन तालिबान की पाबंदी के बाद महिलाओं को ये जरूरी इलाज भी नहीं मिल पा रहा है

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई क्षेत्रों में मिसकैरेज के बाद महिलाओं को जरूरी दवाएं और फॉलो-अप ट्रीटमेंट नहीं मिल पा रहा है इससे संक्रमण और गंभीर जटिलताओं का खतरा बढ़ गया है। कुछ मामलों में महिलाओं की हालत बिगड़ने के बावजूद उन्हें अस्पताल ले जाने से परिवार डर रहा है, क्योंकि तालिबान की सख्ती के चलते पूछताछ और दबाव का सामना करना पड़ सकता है मानवाधिकार संगठनों ने तालिबान के इस फैसले पर कड़ी चिंता जताई है उनका कहना है कि यह कदम महिलाओं के स्वास्थ्य अधिकारों का खुला उल्लंघन है संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह अफगानिस्तान में महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं की सुरक्षा के लिए दबाव बनाएगौरतलब है कि सत्ता में आने के बाद से ही तालिबान महिलाओं की शिक्षा,

रोजगार और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी पर लगातार प्रतिबंध लगाता रहा है। अब गर्भनिरोधक दवाओं पर रोक को इसी कड़ी का एक और कठोर कदम माना जा रहा हैविशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह पाबंदी लंबे समय तक जारी रही, तो अफगानिस्तान में महिलाओं और बच्चों की सेहत पर इसके दूरगामी और खतरनाक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल देश की महिलाएं डर, असुरक्षा और स्वास्थ्य संकट के बीच जिंदगी जीने को मजबूर हैं
