दरभंगा- सरकारी योजना के तहत पुरुषों के बैंक खातों में आए 10-10 हजार रुपये अब विवाद का कारण बन गया है जिन लोगों के खातों में यह रकम ट्रांसफर हुई थी उन्हें अब सरकार की ओर से पैसे वापस लौटाने का नोटिस भेजा जा रहा है नोटिस मिलते ही लोगों में नाराजगी फैल गई है और कई जगह इसका विरोध भी शुरू हो गया है प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्हें लगा था कि सरकार की ओर से आर्थिक मदद दी गई है, इसलिए उन्होंने पैसे खर्च कर दिए अब अचानक रकम लौटाने को कहा जा रहा है, जो उनके लिए मुश्किल बन गया है नोटिस मिलने के बाद कई पुरुषों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है उनका कहना है कि अगर सरकार को पैसे वापस चाहिए तो फिर उनका वोट भी वापस लिया जाए बिना किसी स्पष्ट जानकारी के खातों में पैसा डाल दिया गया और अब गलती का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है

कई लोगों ने इसे प्रशासन की लापरवाही बताया है स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ समय पहले अचानक उनके बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये जमा हुए थे न तो कोई लिखित सूचना दी गई और न ही यह स्पष्ट किया गया कि यह रकम किस योजना के तहत दी जा रही है ऐसे में लोगों ने मान लिया कि यह सरकार की ओर से दी जा रही आर्थिक सहायता है कई परिवारों ने इस पैसे का इस्तेमाल घरेलू जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और कर्ज चुकाने में कर दिया अब जब प्रशासन की ओर से नोटिस भेजे गए हैं, तो लोगों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है इस नोटिस में कहा गया है कि यह रकम गलती से ट्रांसफर हो गई थी और इसे तय समय के भीतर वापस करना होगा कई लोगों का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे एकमुश्त 10 हजार रुपये वापस कर सकेंग्रामीण इलाकों में इस मुद्दे को लेकर खासा रोष देखा जा रहा है कुछ जगहों पर लोगों ने सामूहिक रूप से प्रशासन से इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है अगर यह रकम गलती से डाली गई थी, तो इसकी जिम्मेदारी अधिकारियों की बनती है,

न कि आम जनता की इस मामले ने राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि यह लोगों के साथ अन्याय है उनका आरोप है कि पहले खाते में पैसा डालकर लोगों को भ्रमित किया गया और अब उनसे वसूली की जा रही है सरकार को या तो यह रकम माफ करनी चाहिए या फिर आसान किस्तों में लौटाने का विकल्प देना चाहिएवहीं, प्रशासन का पक्ष है कि यह तकनीकी त्रुटि के कारण हुआ और जिन खातों में गलत तरीके से पैसे ट्रांसफर हुए हैं, उन्हें वापस लेना जरूरी है सरकारी धन जनता का पैसा होता है और गलती से गया पैसा वापस लेना नियमों के तहत जरूरी है।ल हालांकि, प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर मानवीय आधार पर कुछ राहत दी जा सकती है इस तरह की घटनाएं सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं

अगर पहले से स्पष्ट जानकारी दी जाती और पारदर्शिता रखी जाती, तो यह स्थिति पैदा नहीं होती उनका मानना है कि सरकार को ऐसे मामलों में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए, क्योंकि आम लोगों की आर्थिक हालत पहले से ही कमजोर है फिलहाल, 10-10 हजार रुपये लौटाने के नोटिस ने कई परिवारों की चिंता बढ़ा दी है लोग प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार इस मामले में कोई राहत भरा फैसला लेगी
