करीब चार साल बाद यूक्रेन युद्ध को लेकर एक अहम कूटनीतिक पहल देखने को मिली है यूक्रेन, रूस और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच पहली बार सीधी बैठक हुई, जिसे युद्ध समाप्ति की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है हालांकि बातचीत की शुरुआत में ही सबसे बड़ा विवाद सामने आ गया—जमीन छोड़ने को लेकर। यूक्रेन ने साफ कर दिया कि वह किसी भी कीमत पर अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा, वहीं रूस अपने कब्जे वाले इलाकों पर अड़ा हुआ हैबैठक का उद्देश्य युद्धविराम, मानवीय राहत और भविष्य की शांति प्रक्रिया पर सहमति बनाना था अमेरिका ने इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाई और दोनों पक्षों को संवाद के लिए एक मंच पर लाने की कोशिश की अमेरिकी प्रतिनिधियों ने कहा कि युद्ध का लंबा खिंचना पूरी दुनिया के लिए नुकसानदेह है और अब कूटनीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिएयूक्रेन के प्रतिनिधियों ने बैठक में दो टूक शब्दों में कहा कि शांति के बदले जमीन देना किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं है। यूक्रेन का तर्क है कि अगर आज जमीन छोड़ी गई,

तो यह भविष्य में और आक्रामकता को बढ़ावा देगा राष्ट्रपति जेलेंस्की की लाइन को दोहराते हुए यूक्रेनी पक्ष ने कहा कि देश की सीमाएं और संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं होगादूसरी ओर रूस ने अपने रुख में नरमी नहीं दिखाई। रूसी प्रतिनिधियों का कहना है कि जिन क्षेत्रों पर वह नियंत्रण कर चुका है, उन्हें लेकर कोई भी समाधान उसकी शर्तों के बिना संभव नहीं है रूस ने सुरक्षा गारंटी और अपने हितों को बातचीत का अहम हिस्सा बताया, जिससे साफ है कि रास्ता अभी आसान नहीं हैबैठक के दौरान मानवीय मुद्दों पर कुछ सहमति बनती दिखी। दोनों पक्षों ने युद्धबंदियों की अदला-बदली, नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय सहायता पहुंचाने जैसे मुद्दों पर आगे बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई हालांकि जमीन और सीमा जैसे मूल सवालों पर कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सकाइसी बीच इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी का बयान अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया मेलोनी ने कहा कि अगर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस युद्ध को खत्म कराने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं,

तो वह उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करेंगी उनके इस बयान को पश्चिमी राजनीति में ट्रम्प की संभावित भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा हैविशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक भले ही तुरंत युद्ध खत्म न कर पाए, लेकिन संवाद की शुरुआत अपने आप में अहम है लंबे समय से बंद पड़े कूटनीतिक दरवाजे खुलना यह संकेत देता है कि सभी पक्ष अब सैन्य समाधान के बजाय राजनीतिक रास्ते तलाशने को मजबूर हैंअंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब आने वाले दौर की बैठकों पर टिकी हैं सवाल यह है कि क्या जमीन के मुद्दे पर कोई बीच का रास्ता निकलेगा या यह युद्ध और लंबा खिंचेगा। फिलहाल इतना तय है कि चार साल बाद हुई यह बैठक यूक्रेन युद्ध के इतिहास में एक अहम मोड़ मानी जा रही है
