लंदन में बढ़ते सुपर रिच टैक्स और सख्त आर्थिक नीतियों के बीच 75 वर्षीय भारतीय मूल के अरबपति ने ब्रिटेन छोड़ने का फैसला किया है। लंबे समय से UK में रह रहे यह उद्योगपति अब ऐसे देश में शिफ्ट होने की तैयारी में हैं जहाँ टैक्स का बोझ कम हो और बिज़नेस के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध हो।अरबपति का नया ठिकाना यूएई या मोनाको जैसा टैक्स-फ्रेंडली देश हो सकता है, जहां हाई-नेटवर्थ व्यक्तियों के लिए निवेश और रेजिडेंसी की सुविधाएं बेहद आसान मानी जाती हैं।पिछले कुछ वर्षों में ब्रिटेन की आर्थिक नीतियों में बड़े बदलाव हुए हैं। खासकर हाई-इनकम ग्रुप पर लगने वाले अतिरिक्त सरचार्ज टैक्स ने कई बड़े निवेशकों और प्राइवेट बिज़नेस ओनर्स को विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया है।

ब्रिटेन सरकार द्वारा सुपर रिच पर टैक्स बढ़ाने के फैसले के बाद से बड़ी संख्या में HNI और NRI निवेशक देश छोड़ने के मूड में दिखे हैं। यह अरबपति भी पिछले एक साल से अपने टैक्स सलाहकारों के साथ नई वैकल्पिक स्थाई रिहाइश की तलाश में थे।बताया जा रहा है कि अरबपति अपने परिवार और बिज़नेस ऑपरेशंस को ऐसे देश में शिफ्ट करना चाहते हैं जहाँ कैपिटल गेन टैक्स बेहद कम हो, इन्वेस्टमेंट पर छूट मिले और रिटायरमेंट के बाद शांतिपूर्ण जीवन की सहूलियत भी उपलब्ध हो। यूएई और मोनाको जैसे देशों में न सिर्फ टैक्स में राहत मिलती है, बल्कि इंटरनेशनल बिज़नेस के लिए भी उत्कृष्ट इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है।
