ब्रिटेन की प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनियन में आयोजित एक डिबेट के दौरान भारतीय और पाकिस्तानी छात्रों के बीच हुई तीखी बहस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है इस डिबेट में भारतीय छात्र ने पाकिस्तान को लेकर कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा है कि बेशर्म देश को शर्मिंदा नहीं किया जा सकता और भारत ने मुंबई आतंकी हमले से एक कड़वा लेकिन अहम सबक लिया है डिबेट के दौरान पाकिस्तानी छात्र द्वारा भारत की नीतियों और कश्मीर मुद्दे पर सवाल उठाए जाने के बाद भारतीय छात्र ने जोरदार पलटवार किया है

भारत को बार-बार आतंकवाद का सामना करना पड़ा है और 2008 के मुंबई आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था इस हमले के बाद भारत ने न केवल अपनी सुरक्षा नीतियों को मजबूत किया, बल्कि आतंकवाद को लेकर वैश्विक मंचों पर भी सख्त रुख अपनाया है जब तक आतंकवाद को राज्य की नीति के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहेगा, तब तक किसी भी देश की अंतरराष्ट्रीय छवि नहीं सुधर सकती आतंक को पालने-पोसने वाले देश नैतिकता की बातें नहीं कर सकते इस बयान के बाद ऑक्सफोर्ड यूनियन के हॉल में मौजूद छात्रों के बीच तालियों और प्रतिक्रियाओं का माहौल बन गया डिबेट के दौरान माहौल कई बार काफी गर्म हो गया, लेकिन आयोजन समिति ने चर्चा को नियंत्रित बनाए रखा भारत ने बीते वर्षों में यह समझ लिया है कि केवल बयानबाज़ी से नहीं, बल्कि ठोस नीतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही आतंकवाद का जवाब दिया जा सकता है

मुंबई हमले ने भारत को यह सिखाया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर किसी भी तरह की नरमी भारी पड़ सकती है इस बहस का वीडियो और छात्रों के बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं कई भारतीय यूजर्स ने ऑक्सफोर्ड यूनियन जैसे वैश्विक मंच पर भारत का पक्ष मजबूती से रखने के लिए भारतीय छात्र की सराहना की है वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि इस तरह की बहसें दोनों देशों के युवाओं के बीच विचारों के टकराव को उजागर करती हैं राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि ऑक्सफोर्ड यूनियन जैसी जगहों पर होने वाली ऐसी डिबेट केवल छात्रों की बहस नहीं होती, बल्कि वे भारत–पाक संबंधों, आतंकवाद और वैश्विक राजनीति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय सोच को भी प्रभावित करती हैं, यह डिबेट एक बार फिर दिखाती है कि आतंकवाद और सुरक्षा जैसे मुद्दे आज भी भारत–पाक रिश्तों के केंद्र में बने हुए हैं
