
नेपाल ने अपना नया 100 रुपये का बैंकनोट जारी कर दिया है। इस नोट पर छपे नेपाल के आधिकारिक मानचित्र में लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है। भारत ने इसे पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि ये क्षेत्र भारत के उत्तराखंड राज्य का हिस्सा हैं और नेपाल का यह कदम एकतरफा, गलत और अस्वीकार्य है।
1. नोट कैसा दिखता है? (पूरी डिटेल समझिए)
– मूल्य: केवल 100 नेपाली रुपये का नोट
– रंग: हल्का बैंगनी-गुलाबी – बीच में: हल्के हरे रंग में नेपाल का पूरा नया राजनीतिक मानचित्र
– मानचित्र में खास बदलाव: उत्तर-पश्चिम कोने में एक त्रिकोण जैसा हिस्सा बढ़ाया गया है, जिसमें लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को नेपाल में दिखाया गया है
– सामने की तरफ: माउंट एवरेस्ट की तस्वीर, लुम्बिनी का अशोक स्तंभ, लिखा हुआ – “भगवान बुद्ध का जन्मस्थान”
– पीछे की तरफ: एक सींग वाला गैंडा (नेपाल का राष्ट्रीय पशु) और लालीगुराँस फूल का वॉटरमार्क
जारी करने की तारीख:
विक्रम संवत 2081 (यानी 2024-25) – अभी तक सिर्फ इसी एक नोट पर नया नक्शा लगा है, बाकी सभी नोटों (5, 10, 20, 50, 500, 1000) पर पुराना नक्शा ही है।
2. ये तीन इलाके कौन से हैं और क्यों इतने महत्वपूर्ण हैं?

लिम्पियाधुरा: सबसे ऊपरी हिस्सा, नेपाल कहता है यहीं से काली नदी निकलती है
– कालापानी: यहाँ काली नदी का उद्गम भारत मानता है, भारतीय सेना का बड़ा बेस है
– लिपुलेख: ऊँचा दर्रा, यहीं से कैलाश-मानसरोवर जाने का सबसे छोटा रास्ता है ये तीनों मिलाकर करीब 370 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र है। यहाँ भारत-नेपाल-चीन तीनों देशों की सीमा मिलती है (Tri-junction)। भारत ने 2020 में यहाँ तक पक्की सड़क बना ली है, जिससे नेपाल को बहुत आपत्ति हुई थी।
3. नेपाल ने ऐसा क्यों किया? (नेपाल के अंदर की पूरी कहानी)
2020 में तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली की सरकार ने भारत द्वारा लिपुलेख सड़क बनाए जाने के बाद बहुत आक्रामक रुख अपनाया था।
मई 2020: नेपाल ने नया नक्शा जारी किया
– जून 2020: नेपाल की संसद ने नया नक्शा संविधान में डाल दिया
– अब 2025 में उसे 100 रुपये के नोट पर भी छाप दिया गया नेपाल में कोई भी राजनीतिक दल इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटना चाहता क्योंकि इसे “राष्ट्रीय गौरव और स्वाभिमान” का सवाल बना दिया गया है। अभी प्रचंड की सरकार है, लेकिन ओली भी पीछे से दबाव बनाए हुए हैं।
4. भारत का स्टैंड क्या है?
समझिए भारत सरकार ने 27 नवंबर 2025 को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के जरिए आधिकारिक बयान दिया: – “नेपाल द्वारा अपने मुद्रा पर एकतरफा और काल्पनिक मानचित्र छापना दुर्भाग्यपूर्ण है।” – “ऐसे कदमों से जमीन की हकीकत नहीं बदलती।” – “लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा भारत के अभिन्न अंग हैं।” – “सुगौली संधि 1816 के अनुसार काली नदी का उद्गम और सीमा स्पष्ट है।” – “हम नेपाल से अपेक्षा करते हैं कि वह भारत की संप्रभुता का सम्मान करे।”
5. इतिहास क्या कहता है? (सुगौली संधि को आसान भाषा में समझिए)
1816 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के बीच सुगौली की संधि हुई थी। संधि में लिखा है: “काली नदी के पूर्व का पूरा क्षेत्र नेपाल को और पश्चिम का क्षेत्र ब्रिटिश भारत को मिलेगा।” अब विवाद इस बात पर है कि काली नदी कहाँ से निकलती है? – नेपाल कहता है: लिम्पियाधुरा से → इसलिए ये तीनों क्षेत्र नेपाल के – भारत कहता है: एक कृत्रिम झरने से (कालापानी के नीचे) → इसलिए ये क्षेत्र भारत के भारत के पास 19वीं सदी के बहुत सारे पुराने नक्शे, रेवेन्यू रिकॉर्ड और लगातार प्रशासनिक नियंत्रण के प्रमाण हैं।
6. अब आगे क्या हो सकता है?

भारत शायद नेपाल के राजदूत को तलब करेगा – सचिव स्तर की वार्ता फिर शुरू करने की कोशिश हो सकती है (2019 के बाद रुकी हुई है) – नेपाल में राष्ट्रवादी भावनाएँ और तेज होंगी – चीन इस मुद्दे पर चुपचाप नेपाल का समर्थन करता रहेगा (क्योंकि भारत को दो मोर्चों पर व्यस्त रखना उसके हित में है)
अंतिम बात:-
100 रुपये का एक छोटा सा कागज का टुकड़ा फिर से दो पड़ोसी देशों के बीच पुराना जख्म हरा कर रहा है। भारत का रुख बिल्कुल साफ है – बातचीत से हल निकालो, एकतरफा नक्शे या नोट छापने से कुछ नहीं होगा। नेपाल के लिए यह राष्ट्रवादी संदेश है, भारत के लिए संप्रभुता का सवाल। अब देखना यह है कि दोनों देश इस बार बातचीत की मेज पर बैठते हैं या फिर तनाव और बढ़ता है।
रिपोर्ट
अंकित शेखावत
