पटना। प्रेम की कोई सीमा नहीं होती, न देश की और न संस्कृति की। ये बात एक बार फिर साबित हो गई जब ऑस्ट्रेलिया की मशहूर चित्रकार टेसा बार्थोलोमियो ने बिहार के होनहार रिसर्च साइंटिस्ट डॉ. केतन पटेल के साथ हिंदुस्तानी अंदाज में परिणय सूत्र में बंध गईं। दानापुर के सीओआई क्लब में शुक्रवार को हुई शादी में न सिर्फ भारतीय रंग घुले बल्कि ऑस्ट्रेलियाई मेहमान भी देसी धुनों पर यूं झूमे कि रिसेप्शन देर रात तक चलता रहा।

टेसा बार्थोलोमियो, जिनकी पेंटिंग्स दुनिया के बड़े-बड़े गैलरी में जगह बना चुकी हैं, लाल जोड़े में इतनी सुंदर लग रही थीं मानो कोई बॉलीवुड हीरोइन दुल्हन बनी हो। वहीं केतन, जो मूलतः नवादा के रहने वाले हैं और इस वक्त एडिलेड यूनिवर्सिटी में हाइड्रोजन एनर्जी पर शोध कर रहे हैं, शेरवानी में किसी राजकुमार से कम नहीं लग रहे थे।दोनों की प्रेम कहानी भी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं। ऑस्ट्रेलिया में एक सांस्कृतिक आयोजन में पहली नजर का इश्क हुआ। बातचीत बढ़ी, दोस्ती गहरी हुई और फिर प्यार ने दोनों को एक-दूसरे का बना दिया। टेसा को भारतीय संस्कृति इतनी भा गई कि उन्होंने साफ कह दिया, “शादी करनी है तो हिंदुस्तानी रीति-रिवाजों से, वरना नहीं!” बस फिर क्या था, टेसा का पूरा परिवार ऑस्ट्रेलिया से पटना पहुंच गया। पिता जॉन बार्थोलोमियो (जो कभी काउंटी क्रिकेट खेलते थे और अब सरकारी मार्केटिंग ट्रेनर हैं), मां कैरोलिन, बहन लिनसे, जीजा डैन और नन्हे-मुन्ने बच्चे भी शामिल हुए। समधी मिलन के वक्त जॉन ने खुद रंजीत कुमार पटेल (केतन के पिता और नवादा बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष) को माला पहनाई, पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा।रिसेप्शन में जब डीजे ने पुराने हिंदी गाने चलाए तो ऑस्ट्रेलियाई मेहमानों ने कमाल कर दिया। “लोग कहते हैं मैं शराबी हूं…” पर टेसा के परिवार वाले ऐसे नाचे कि देसी मेहमान भी देखते रह गए। कोई ठुमके लगा रहा था, कोई डांस फ्लोर पर डीजे को और जोर से बजाने को कह रहा था।टेसा ने मुस्कुराते हुए कहा, “भारत में जो अपनापन और प्यार मिला, वो कहीं और नहीं मिला। मैं खुशनसीब हूं कि मेरी जिंदगी का कैनवास अब बिहार के रंगों से भी रंगा जाएगा।”तो इस तरह एक ऑस्ट्रेलियाई ब्रश और बिहारी दिमाग ने मिलकर दुनिया की सबसे खूबसूरत प्रेम कहानी लिख दी। दिल से दुआएं कि ये जोड़ी हमेशा ऐसे ही रंग बिखेरती रहे !
रिपोर्ट
अंकित शेखावत
