गुजरात का एक छात्र, जो वर्तमान में यूक्रेन में फंसा हुआ है, ने हाल ही में एक वीडियो के माध्यम से अपनी परेशानियों का खुलासा किया है छात्र ने दावा किया कि उसे झूठे ड्रग्स केस में फंसाकर रूसी सेना में जबरन भर्ती कराया गया और उसे युद्ध में भेजा गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और इसके बाद से इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चिंता बढ़ गई है

यूक्रेन में रूसी सैनिकों द्वारा उसे जबरन भर्ती किया गया उसने कहा कि शुरुआत में उसे केवल स्थानीय प्रशासन की ओर से पूछताछ के लिए बुलाया गया, लेकिन कुछ समय बाद उसे गलत आरोपों में फंसाकर रूसी सेना के प्रशिक्षण केंद्र में भेज दिया गया छात्र ने अपनी बात में स्पष्ट किया कि वह किसी भी तरह के सैन्य संघर्ष का हिस्सा नहीं बनना चाहता था, लेकिन उसे मजबूरी में युद्ध के लिए तैयार किया गया भर्ती के दौरान उसे कई तरह की धमकियां दी गईं और उसके परिवार को भी डराने-धमकाने की कोशिश की गई वह अपनी सुरक्षा और जीवन के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है और उम्मीद करता है कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों और भारतीय प्रशासन की मदद से उसे सुरक्षित वापस लाया जा सके यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जहां विदेशी नागरिकों और छात्रों को जबरदस्ती युद्ध में शामिल किया गया। भारत सरकार ने अब तक ऐसे मामलों पर ध्यान देने की कोशिश की है

और विदेश मंत्रालय द्वारा प्रभावित छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैंछात्र का यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहा है वीडियो में उसने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उसे किसी भी प्रकार के सैन्य कार्य में शामिल नहीं होना था और इस पूरी प्रक्रिया में वह मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान रहा।भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क कर छात्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है ऐसे मामलों में छात्रों और नागरिकों की सहायता करना उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए सभी संभव कदम उठाए जा रहे हैं ऐसे मामले अंतरराष्ट्रीय कानून और युद्ध अपराध के दायरे में आते हैं जबरन किसी व्यक्ति को युद्ध में शामिल करना गंभीर अपराध है और इसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि युद्ध की स्थितियों में आम नागरिक और छात्र किस हद तक सुरक्षित हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर कितनी तेजी से ध्यान देता है छात्र का यह वीडियो इस बात का प्रतीक बन गया है कि ऐसे संघर्षों में सबसे ज्यादा नुकसान आम लोग और छात्र ही उठाते हैं।इस घटना ने भारत में भी चिंता बढ़ा दी है।कई राजनीतिक और सामाजिक संगठन इस मामले पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं और छात्र की सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे है ऐसे मामलों में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करता है
