मुंबई: हिंदी सिनेमा के दिग्गज 89 वर्ष के अभिनेता धर्मेंद्र का सोमवार को निधन हो गया। व उनका जाना न सिर्फ परिवार के लिए बल्कि पूरे फिल्म उद्योग और उनके चाहने वालों के लिए अपूरणीय क्षति है। धर्मेंद्र की फिल्मी यात्रा छह दशकों से अधिक लंबी रही और उन्होंने 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। उन्हें ही‑मैन और भारतीय सिनेमा के मजबूत अभिनेता के रूप में याद किया जाएगा।धर्मेंद्र पिछले कुछ समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्हें सांस लेने में भी कठिनाई थी और उन्हें ब्रीच कैंडी अस्पताल, मुंबई में भर्ती किया गया था। कुछ समय वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहने के बाद उन्हें घर पर इलाज के लिए डिस्चार्ज किया गया था। लेकिन सोमवार सुबह उनका निधन हो गया।उनका अंतिम संस्कार विले पार्ले के पवन हंस क्रेमेटोरियम में हुआ। इस दौरान बॉलीवुड और राजनीतिक जगत की कई बड़ी हस्तियाँ, उनके परिवार और करीबी मित्र वहां मौजूद रहे।

अभिनेता अमिताभ बच्चन, सलमान खान, आमिर खान, अक्षय कुमार सहित कई सितारे उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है *परिवार का दुख :-धर्मेंद्र के निधन की खबर ने उनके परिवार को गहरे शोक में डाल दिया है खासकर उनके बड़े बेटे सनी देओल पापा को खोकर पूरी तरह टूट गए है अंतिम संस्कार के दौरान उनके चेहरे पर गहरी मायूसी और दुख साफ़ झलक रहा था। छोटी बेटी ईशा देओल की आंखें भी नम थीं और उनके आंसू उनके गम को बयाँ कर रहे थे। परिवार के बाकी सदस्य भी इस क्षति से गहरे प्रभावित नजर आए है वही धर्मेंद्र की पत्नी हेमा मालिनी भी अत्यंत दुखी थीं। परिवार ने मीडिया के सामने भावनाओं को कंट्रोल करते हुए उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने वालों का धन्यवाद किया।उनके चाहने वाले और फैंस सोशल मीडिया के जरिए श्रद्धांजलि दे रहे हैं*फिल्मी जीवन और विरासत:-धर्मेंद्र ने बॉलीवुड में लगभग छह दशक तक काम किया और उन्होंने शोले, फूल और पत्थर, चुपके चुपके, मेरे गाँव मेरा देश जैसी फिल्में दीं। उनकी फिल्में आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं। उनका आखिरी प्रोजेक्ट इस साल दिसंबर में रिलीज़ होने वाली थी। उन्हें पद्म भूषण जैसे पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया था धर्मेंद्र का जाना हिंदी सिनेमा के एक युग के अंत जैसा माना जा रहा है। वे सिर्फ बड़े परदे के हीरो नहीं थे, बल्कि उनके सरल व्यवहार इंसानियत और करिश्माई व्यक्तित्व ने उन्हें एक अद्वितीय पहचान दिलाई है उनके परिवार के लिए यह क्षति अपूरणीय है लेकिन उनके योगदान और यादें आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।
