देशभर में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इससे होने वाले हादसों की खबरें भी बढ़ती जा रही हैं छोटे बच्चे, बुजुर्ग और आम लोग इन कुत्तों के हमलों का शिकार हो रहे हैं हाल ही में आए कुछ मामलों में बच्चों और बड़ों को गंभीर रूप से काटा गया, जबकि कुछ मामलों में लोगों की जान भी जा चुकी है। इन घटनाओं के मद्देनज़र सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और स्थानीय प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्र की सड़कें और सार्वजनिक स्थान आवारा कुत्तों से सुरक्षित और खाली रखें सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आवारा कुत्तों की वजह से बढ़ रहे सड़क हादसों और हमलों पर ध्यान देना अब राष्ट्रीय सुरक्षा और जनता की सुरक्षा का मामला बन गया है कोर्ट ने आदेश में कहा कि केवल लोगों की सुरक्षा ही नहीं बल्कि बच्चों की शिक्षा और बुजुर्गों की स्वतंत्रता भी प्रभावित हो रही है

अदालत ने सभी राज्य सरकारों और नगर निगमों से पूछा है कि वे किस प्रकार आवारा कुत्तों के प्रबंधन और नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या केवल मानव जीवन के लिए खतरा नहीं है, बल्कि यह सड़क हादसों, ट्रैफिक जाम और स्वास्थ्य समस्याओं का भी कारण बन रही है कुत्तों को पकड़ने और सुरक्षित शरणस्थलों में भेजने की योजना बनानी होगी, बल्कि लोगों को जागरूक करने और काटे जाने की स्थिति में त्वरित इलाज की सुविधाएं सुनिश्चित करनी होंगी राज्य और नगर पालिकाओं को आवारा कुत्तों के लिए पशु चिकित्सकीय सेवाओं की व्यवस्था करनी होगी, ताकि उन्हें हानिकारक न बनाते हुए नियंत्रण किया जा सके अदालत ने अधिकारियों से यह भी पूछा कि क्या वे सतत निगरानी, टीकाकरण और जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठा रहे हैं आवारा कुत्तों की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे सीधे आम जनता और बच्चों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है यदि राज्य और स्थानीय प्रशासन इस दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाते हैं

तो इसके लिए उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा आवारा कुत्तों से होने वाले हमलों और मौतों की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की होगी अदालत के इस आदेश के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि आवारा कुत्तों की समस्या को नियंत्रित करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे वहीं, पशु अधिकार संगठनों ने भी इसे सकारात्मक कदम माना है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में जानवरों के प्रति हानिकारक और क्रूर उपाय नहीं होने चाहिए इस आदेश का सीधा असर यह होगा कि आने वाले समय में शहरों और गांवों की सड़कें और सार्वजनिक स्थान लोगों के लिए अधिक सुरक्षित होंगे बच्चों को खेलते समय और बुजुर्गों को बाहर निकलते समय अब अधिक सुरक्षा मिल सकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने सभी नागरिकों से भी अपील की है कि वे आवारा कुत्तों को सुरक्षित और मानवीय तरीके से संभालने में सहयोग करें, ताकि एक संतुलित और सुरक्षित समाज बनाया जा सके
