सबको पता है कि इस समय इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध चल रही है। ऐसे में भारत का तेल आयात भी प्रभावित हो सकता है। ईरान हार्मुज़ स्ट्रेट बंद कर दिया है, तो सवाल उठता है कि भारत तक तेल आखिर आएगा कैसे? क्या भारत रूस से तेल नहीं ले सकता? अगर ले सकता है, तो फिर हमें हर बार अमेरिका की तरफ देखकर फैसला क्यों लेना पड़ता है? क्या भारत जैसे बड़े और ताकतवर देश को अपनी ऊर्जा नीति के लिए भी किसी दूसरे देश की अनुमति लेनी पड़ेगी?

आज भी ऐसा क्यों लगता है कि भारत अपनी मर्जी से फैसला नहीं कर सकता? क्या हम इतने कमजोर हो चुके हैं कि दूसरे देश जैसा कहेंगे, वैसा ही करना पड़ेगा? भारत एक उभरती हुई महाशक्ति है, फिर भी कई बार हमारी नीतियों में आत्मनिर्भरता और स्पष्टता की कमी क्यों दिखाई देती है? देश के हित में फैसले लेने की हिम्मत और स्वतंत्रता आखिर कब दिखाई देगी?
