असम के प्रसिद्ध गायक और संगीतकार समर हजारिका का निधन हो गया है वे 75 साल के थे संगीत और संस्कृति के क्षेत्र में उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा समर हजारिका भारत रत्न भूपेन हजारिका के सबसे छोटे भाई थे और उन्होंने अपने भाई के नक्शेकदम पर चलते हुए असमिया संगीत को नई पहचान दी उनका निधन असम और पूरे देश के संगीत प्रेमियों के लिए एक बड़ा झटका हैसमर हजारिका ने असम और पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उनकी गायकी में लोकसंगीत की मिठास और आधुनिक संगीत का समन्वय देखने को मिलता था वे असमिया संगीत समारोहों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में नियमित रूप से अपनी प्रस्तुति देते रहे। उनके गानों ने न केवल असम में बल्कि पूरे भारत में संगीत प्रेमियों के दिलों में जगह बनाई संगीत जगत में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा समर हजारिका ने न केवल पारंपरिक लोकगीतों को संरक्षित किया,

बल्कि नए गीतों और संगीत रचनाओं के माध्यम से असम की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत किया उनके संगीत में भाव और संवेदनाओं की गहराई थी, जो श्रोताओं को सीधे उनके अनुभवों और कहानियों से जोड़ती थीसमर हजारिका के निधन की खबर से असम और पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है संगीतकारों, कलाकारों और प्रशंसकों ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं उनके योगदान और यादों को सम्मान देने के लिए कई सांस्कृतिक संस्थानों ने श्रद्धांजलि सभा आयोजित करने की घोषणा की हैसमर हजारिका के परिवार के लोग भी संगीत और संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े रहे हैं भूपेन हजारिका जैसे महान संगीतकार के छोटे भाई के रूप में समर ने भी अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाया उनके परिवार और प्रशंसकों के लिए यह समय कठिन है, क्योंकि समर हजारिका ने अपने जीवन में संगीत और संस्कृति को सबसे बड़ा संदेश दियासमर हजारिका का जीवन और संगीत यह सिखाता है कि सांस्कृतिक विरासत को संजोना और उसे नई पीढ़ी तक पहुँचाना कितना महत्वपूर्ण है उनके गाने और संगीत कार्यक्रम आज भी लोगों के दिलों में जीवित है

उन्होंने असम के लोकगीतों और आधुनिक संगीत के बीच सेतु बनाया, जिससे श्रोताओं को दोनों दुनिया का अनुभव हुआसंगीत विशेषज्ञों का कहना है कि समर हजारिका की गायकी और रचनाओं का अध्ययन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेगा उन्होंने असमिया संगीत को न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता दिलाई। उनका निधन असम और भारत के संगीत जगत में अपूरणीय क्षति हैअसम सरकार और विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है और उनके योगदान को याद किया है श्रद्धांजलि कार्यक्रमों और संगीत समारोहों के माध्यम से समर हजारिका की यादें हमेशा जीवित रहेंगी 75 वर्ष की आयु में समर हजारिका का निधन संगीत और संस्कृति की दुनिया के लिए एक बड़ा नुकसान है उनके गाने, रचनाएं और सांस्कृतिक योगदान हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे समर हजारिका ने असम और भारत के संगीत पर अमिट छाप छोड़ी है और उन्हें हमेशा याद किया जाएगा
