मिडिल-ईस्ट से बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है। आज 4 मार्च को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 92.05 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले जनवरी में रुपया 91.98 तक गिरा था।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण रुपए पर दबाव बढ़ रहा है। साल 2026 की शुरुआत से अब तक रुपया 2% से ज्यादा कमजोर हो चुका है, और यह दुनिया के इमर्जिंग मार्केट्स की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी में शामिल हो गया है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो रुपए पर दबाव आगे भी जारी रह सकता है।
