मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ आदिवासियों का जल सत्याग्रह 12 दिन से जारी था। मोदी सरकार की इस ‘राष्ट्रीय महत्व’ की परियोजना के नाम पर 24 गांव डूब रहे हैं, हजारों आदिवासी परिवार बेघर हो रहे हैं। महिलाएं केन नदी में छाती तक पानी में खड़ी होकर, प्रतीकात्मक चिताओं पर लेटकर और मिट्टी सत्याग्रह कर चीख-चीख कर कह रही हैं ‘हमारी जमीन, जंगल और जीवन मत छीनोलेकिन सवाल ये है

मोदी सरकार उचित मुआवजा और जमीन के बदले जमीन देने में क्यों नाकाम है और सबसे शर्मनाक ये कि मुख्यधारा की मीडिया इस आदिवासी आंदोलन को पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है। जब विकास के नाम पर आदिवासियों की बलि चढ़ाई जा रही हो, तब भी टीवी चैनल और बड़े अखबार आंखें मूंदे बैठे हैं। क्या विकास सिर्फ घोषणाओं तक है, या लोगों की जान-जमीन की कीमत पर? छतरपुर का यह सत्याग्रह सवाल पूछ रहा है
