केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) में किए जा रहे बदलावों को लेकर पंजाब में सियासत तेज हो गई है आम आदमी पार्टी (AAP) ने इन बदलावों के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलते हुए बड़ा ऐलान किया है पार्टी ने कहा है कि पंजाब के करीब 10 लाख मनरेगा मजदूर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी भेजेंगे, जिसमें वे इन बदलावों का विरोध दर्ज कराएंगे और योजना को कमजोर न करने की मांग करेंगे AAP का आरोप है कि केंद्र सरकार लगातार मनरेगा को सीमित करने की दिशा में कदम उठा रही है पार्टी नेताओं का कहना है कि बजट में कटौती, भुगतान प्रक्रिया में जटिलता और तकनीकी शर्तों के चलते मजदूरों को समय पर काम और मजदूरी नहीं मिल पा रही है

इससे ग्रामीण गरीबों, खेत मजदूरों और दिहाड़ी कामगारों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ रहा है AAP ने इन बदलावों को मजदूर विरोधी बताते हुए कहा कि मनरेगा करोड़ों गरीब परिवारों के लिए सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार है पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य में मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है अगर इसे कमजोर किया गया, तो बेरोजगारी बढ़ेगी और गांवों में पलायन जैसी समस्याएं और गंभीर होंगी इसी को लेकर AAP ने राज्यभर में चिट्ठी अभियान शुरू करने का फैसला लिया है इस अभियान के तहत मजदूर अपनी समस्याएं, मांगें और मनरेगा में बदलाव से होने वाले नुकसान को लिखकर प्रधानमंत्री तक पहुंचाएंगे AAP नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण होगा,

पार्टी का कहना है कि मजदूर अपनी आवाज सीधे प्रधानमंत्री तक पहुंचाना चाहते हैं, ताकि केंद्र सरकार को जमीनी हालात की सही जानकारी मिल सके AAP ने मांग की है कि मनरेगा में किए गए सभी मजदूर विरोधी बदलाव वापस लिए जाएं, मजदूरों को समय पर पूरी मजदूरी मिले, काम के दिनों की संख्या बढ़ाई जाए और योजना के बजट में इजाफा किया जाएमनरेगा को लेकर AAP और केंद्र सरकार के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है पार्टी ने संकेत दिए हैं कि अगर सरकार ने मजदूरों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जा सकता है मनरेगा में बदलाव का मुद्दा अब सिर्फ नीति का नहीं, बल्कि ग्रामीण मजदूरों की आजीविका और अधिकारों की बड़ी लड़ाई बनता जा रहा है
