नई दिल्ली — संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर आज से शुरू हो गया है और पहले ही दिन से राजनीतिक टकराव के संकेत साफ नजर आने लगे हैं। एक ओर विपक्ष चुनावी मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान यानी SIR को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर सरकार इस सत्र में अर्थव्यवस्था, बीमा, दिवाला कानून, शिक्षा और टैक्सेशन से जुड़े 14 अहम विधेयक पेश करने जा रही है। गुटखा, पान मसाला और तंबाकू उत्पादो पर चर्चा वाले मुद्दों में शामिल है विपक्षी दलों का कहना है कि SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूचियों में हेराफेरी की संभावनाएं खोलता है और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, DMK, समाजवादी पार्टी समेत कई दल सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि चुनाव से पहले मतदाता सूची बदलने की कोशिश की जा रही है। विपक्ष का लक्ष्य संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करवाना है।सरकार ने इस शीतकालीन सत्र को मेगा रिफॉर्म सत्र के रूप में तैयार किया है। कुल 15 कार्यदिवसों के भीतर 14 बड़े विधेयक पेश किए जाएंगे। इनमें मुख्य रूप से आर्थिक सुधारों से जुड़े बिल भी इसमें शामिल हैं।
1. बीमा कानून संशोधन बिल (Insurance Laws Amendment Bill, 2025):-इस बिल के माध्यम से बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश (FDI) बढ़ाने और कंपनियों को अधिक लचीलापन देने का प्रस्ताव है। सरकार चाहती है कि बीमा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़े और अधिक कंपनियां बाजार में आएं, जिससे प्रीमियम सस्ता और कवरेज बेहतर हो सके।
2. दिवाला व दिवालियापन संशोधन बिल (IBC Amendment Bill, 2025) इस बिल से दिवाला प्रक्रिया को और तेज़, सरल और पारदर्शी बनाया जाएगा। समूह दिवालियापन और सीमा-पार दिवालियापन को मजबूत करने की भी कोशिश होगी, ताकि कंपनियों को संकट से निकालना आसान हो सके।

3. गुटखा, पान मसाला और तंबाकू पर सेस:-सरकार तंबाकू, गुटखा और पान-मसाला जैसे उत्पादों पर अतिरिक्त सेस लगाने जा रही है। इस नए सिन-गुड्स सेस से राजस्व बढ़ाने और स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान को कम करने की नीति पर काम किया जाएगा। इन उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
4. सिक्योरिटीज मार्केट कोड बिल:-यह बिल शेयर बाजार और निवेश से जुड़े कानूनों को सरल और एकीकृत करेगा। इसका मकसद निवेशकों की सुरक्षा बढ़ाना और बाजार में पारदर्शिता लाना है।
5. उच्च शिक्षा आयोग बिल (HECI Bill, 2025):-उच्च शिक्षा को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार नया आयोग स्थापित करना चाहती है। इससे विश्वविद्यालयों को नई दिशाएं मिलेंगी और शिक्षा व्यवस्था अधिक सुचारु हो सकती है।
6. राष्ट्रीय राजमार्ग संशोधन बिल:-भूमि अधिग्रहण, सड़क निर्माण और राष्ट्रीय राजमार्ग प्रबंधन से जुड़े प्रावधानों को सरल बनाया जाएगा।इसके अलावा कंपनी कानून, ऊर्जा क्षेत्र, वित्तीय अनुदान और अन्य प्रशासनिक संशोधन भी सत्र में रखे जाएंगे।

सत्र के पहले दिन से ही माहौल तनावपूर्ण रहा है जहां सरकार बड़ी नीतिगत उपलब्धियों को आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं विपक्ष लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनावी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाने के लिए तैयार है। SIR इस समय विपक्ष की एकता का केंद्र बन गया है यह सत्र विकास बनाम विवाद की लड़ाई का मैदान बनेगा अगर विपक्ष लगातार SIR पर अड़ा रहा, तो सरकार के कई विधेयक अटक सकते हैं।

जनता पर इसका असर बीमा क्षेत्र में सुधार होने से पॉलिसियों के विकल्प बढ़ेंगे, और कई योजनाएं सस्ती हो सकती हैं।दिवाला कानून में बदलाव व्यापारियों और निवेशकों के लिए बड़ी राहत लाएगी गुटखा-सिगरेट पर सेस बढ़ने से इन उत्पादों की कीमतें बढ़ोतरी,सिक्योरिटीज मार्केट में बदलाव निवेश प्रक्रिया को सुरक्षित और आसान बना सकता है।शिक्षा सुधार उच्च शिक्षा की क्वालिटी और मानकों को बेहतर कर सकते हैं।शीतकालीन सत्र का यह दौर इसलिए भी खास है क्योंकि एक तरफ देश में बड़े चुनाव नजदीक हैं, दूसरी ओर सरकार अपनी आर्थिक सुधार यात्रा को आगे बढ़ाना चाहती है। ऐसे में हर दिन, हर बहस और हर फैसला आने वाले महीनों की राजनीति और अर्थव्यवस्था को दिशा देगा।
रिपोर्ट
अमर सिंह
