चीन की सेना में पिछले तीन वर्षों के दौरान अभूतपूर्व उथल-पुथल देखने को मिली है रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में चलाए गए सख्त अभियान के तहत अब तक 30 से ज्यादा सीनियर जनरल और एडमिरल को उनके पदों से हटाया जा चुका है इनमें से कई अफसर अचानक सार्वजनिक जीवन से गायब हो गए, जबकि कुछ को भ्रष्टाचार या वफादारी में कमी के आरोपों के चलते हटाया गयाचीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) और नेवी में यह बदलाव सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक माना जा रहा है विश्लेषकों का कहना है कि शी जिनपिंग सेना में पूर्ण नियंत्रण और व्यक्तिगत वफादारी सुनिश्चित करना चाहते हैं इसी के तहत एक तरह का “लॉयल्टी टेस्ट” लागू किया गया है, जिसमें खरे न उतरने वाले अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है सबसे ज्यादा असर रॉकेट फोर्स, एयरफोर्स और नेवी में देखने को मिला है।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि जिन अफसरों को हटाया गया, वे रणनीतिक हथियार प्रणालियों और संवेदनशील सैन्य परियोजनाओं से जुड़े थे अचानक हुए इन बदलावों से चीन की सैन्य कमान में कई अहम पद खाली हो गए हैं, जिससे आंतरिक स्थिरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं चीनी सरकार ने आधिकारिक तौर पर सभी मामलों पर खुलकर बयान नहीं दिया है हालांकि, सरकारी मीडिया में इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सेना को आधुनिक व अनुशासित बनाने की प्रक्रिया बताया जा रहा है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इसे सत्ता के केंद्रीकरण और सेना को पूरी तरह राजनीतिक नियंत्रण में लाने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं शी जिनपिंग पहले ही खुद को सेना का सर्वोच्च कमांडर घोषित कर चुके हैं 2012 में सत्ता संभालने के बाद से उन्होंने PLA में व्यापक सुधार लागू किए हैं।

सैन्य क्षेत्रों का पुनर्गठन, कमांड स्ट्रक्चर में बदलाव और अब शीर्ष अधिकारियों की छंटनी—ये सभी कदम इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर अधिकारियों को हटाए जाने से चीन की सैन्य तैयारी पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है जानकारों का कहना है कि अनुभवी जनरल और एडमिरल के अचानक बाहर होने से निर्णय प्रक्रिया धीमी हो सकती है और ऑपरेशनल अनुभव की कमी महसूस की जा सकती हैएशिया-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ इसे क्षेत्रीय संतुलन से भी जोड़कर देख रहे हैं दक्षिण चीन सागर, ताइवान और भारत के साथ सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों के बीच चीन की सेना में नेतृत्व संकट पड़ोसी देशों के लिए भी अहम संकेत माना जा रहा है

भारत के संदर्भ में देखें तो PLA में यह अंदरूनी उथल-पुथल रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। सीमा पर तनाव के अनुभव को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि चीनी सेना के नेतृत्व में अस्थिरता उसके निर्णयों को प्रभावित कर सकती है, हालांकि शी जिनपिंग की पकड़ मजबूत होने से आक्रामक रुख की संभावना भी बनी रह सकती है फिलहाल, चीन की सेना में चल रही यह क्लीन-अप ड्राइव खत्म होती नहीं दिख रही। आने वाले महीनों में और बड़े नामों पर कार्रवाई हो सकती है। यह साफ है कि शी जिनपिंग सेना को सिर्फ सैन्य ताकत नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक ताकत का मजबूत स्तंभ बनाना चाहते हैं दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या यह सख्ती चीन की सैन्य क्षमता को और मजबूत करेगी या फिर नेतृत्व के खालीपन से नई चुनौतियां खड़ी होंगी
