गाजियाबाद से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने मोबाइल गेमिंग की लत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक ही परिवार की तीन नाबालिग बहनों ने कथित तौर पर एक साथ अपनी जान दे दी। तीनों की उम्र क्रमशः 12, 14 और 16 साल बताई जा रही है। यह घटना न सिर्फ परिवार के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए गहरी चिंता का विषय बन गई है यह मामला गाजियाबाद के एक रिहायशी सोसायटी का है, जहां तीनों बहनें अपने माता-पिता के साथ रहती थीं बताया जा रहा है कि मोबाइल गेम की लत को लेकर घर में कई बार समझाइश और टोकाटाकी हुई थी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें लंबे समय से ऑनलाइन मोबाइल गेम खेलने की आदी थीं और इसी बात को लेकर वे मानसिक तनाव में थीं घटना के बाद पुलिस को कमरे से एक सुसाइड नोट भी मिला है। नोट में लिखा था— सॉरी मम्मी-पापा, हम गेम नहीं छोड़ पा रहे इस एक पंक्ति ने पूरे मामले को और भी गंभीर बना दिया है। पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग और अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना के पीछे क्या कारण थे और क्या किसी तरह का दबाव या अन्य पहलू भी इसमें शामिल थापरिजनों का कहना है कि तीनों बहनें पढ़ाई में सामान्य थीं,

लेकिन हाल के महीनों में उनका व्यवहार बदला-बदला सा लग रहा था वे ज्यादातर समय मोबाइल पर गेम खेलती रहती थीं। परिवार ने कई बार उन्हें समझाने की कोशिश की, मोबाइल इस्तेमाल सीमित करने की बात कही, लेकिन शायद वे अंदर ही अंदर किसी मानसिक दबाव से गुजर रही थींघटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और पूरे मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक संवेदनशील मामला है और जांच पूरी होने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचा जाएगा यह घटना एक बार फिर बच्चों और किशोरों में बढ़ती मोबाइल और ऑनलाइन गेमिंग की लत पर सवाल खड़े करती है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि कम उम्र में अत्यधिक स्क्रीन टाइम, गेमिंग एडिक्शन और सोशल आइसोलेशन बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकते हैं कई बार बच्चे अपनी परेशानी माता-पिता से साझा नहीं कर पाते और भीतर ही भीतर तनाव बढ़ता चला जाता है विशेषज्ञों की सलाह है कि माता-पिता को बच्चों के साथ खुलकर संवाद करना चाहिए,

उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ भावनात्मक सपोर्ट देना भी उतना ही जरूरी है केवल डांट या पाबंदी लगाने के बजाय बच्चों की मानसिक स्थिति को समझना ज़्यादा असरदार हो सकता है फिलहाल, गाजियाबाद की यह घटना पूरे इलाके में शोक और सन्नाटे का माहौल छोड़ गई है। एक ही परिवार की तीन बेटियों की असमय मौत ने हर किसी को झकझोर दिया है यह मामला समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल आदतों को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक साबित हो सकता है अगर आप या आपके आसपास कोई मानसिक तनाव से जूझ रहा है, तो चुप न रहें। भारत में मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए हेल्पलाइन 9152987821 (किरण) या नजदीकी काउंसलर से संपर्क किया जा सकता है मदद लेना कमजोरी नहीं है
