पटना: बिहार में हालिया मंत्रिमंडल विस्तार में 21 पुराने मंत्री को कैबिनेट से बाहर किया गया है। यह कदम सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि BJP‑JDU गठबंधन की राजनीतिक रणनीति और आगामी चुनाव की तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। जिन मंत्रियों को हटाया गया, उन्हें मीडिया रिपोर्ट्स में ‘नॉन‑परफॉर्मर’ कहा गया है, यानी उनका पिछले कार्यकाल में प्रदर्शन अपेक्षानुसार नहीं रहा।इस दौरान कई नए चेहरे भी मंत्रिमंडल में शामिल किए गए हैं, जिससे यह संदेश दिया गया है कि सरकार ताजा नेतृत्व और नई छवि के साथ जनता के सामने है। विभागों के बंटवारे में जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन का भी ध्यान रखा गया है, ताकि गठबंधन में सभी घटक दलों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके वर्तमान मंत्रिमंडल की अधिकतम संख्या 36 है और अब धीरे-धीरे यह कोटा भरता जा रहा है इस फेरबदल के पीछे रणनीतिक दृष्टि है: पुराने मंत्रियों को हटाकर नए वोट बैंक बनाने, क्षेत्रीय संतुलन साधने और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियों को मजबूत करना और साथ ही, यह बदलाव जनता और विपक्ष को यह संदेश देता है कि सरकार प्रदर्शन और जवाबदेही के आधार पर नेताओं को मौका देती है और बदलाव के लिए तैयार है।नए मंत्रियों में कुछ राजनीतिक परिवारों के सदस्य भी शामिल हैं, जिससे कहीं न कहीं राजनीतिक वंशवाद भी इस फेरबदल का हिस्सा है। कुल मिलाकर, यह कदम BJP‑JDU गठबंधन की नई छवि पेश करने, सत्ता में स्थिरता बनाए रखने और विकास एजेंडों को आगे बढ़ाने की कोशिश माना जा रहा है।
