नई दिल्ली, देश ने जब 76वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और गर्व के साथ मनाया, तो दिल्ली के कर्तव्य पथ पर न केवल भारत की सैन्य ताकत और सांस्कृतिक झांकियों ने लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पारंपरिक पहनावा भी एक बार फिर चर्चा का विषय बना हर साल की तरह इस बार भी पीएम मोदी ने अपने खास लुक के जरिए भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को सम्मान दियाप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गणतंत्र दिवस पर केवल एक राजनीतिक नेता के रूप में नहीं, बल्कि भारत की परंपराओं के प्रतिनिधि के तौर पर भी नजर आते हैं उनका पहनावा हमेशा देश के किसी न किसी राज्य, क्षेत्र या समुदाय की पहचान को सामने लाता है यही वजह है कि उनका लुक हर साल लोगों के बीच खास उत्सुकता का कारण बनता है

इस बार पीएम मोदी ने सिर पर जो पारंपरिक पगड़ी या टोपी पहनी, वह अपने आप में गहरी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान समेटे हुए थी कभी उत्तराखंड की पहचान मानी जाने वाली ब्रह्मकमल टोपी में नजर आ चुके पीएम मोदी, तो कभी उन्हें शाही परिवार से प्राप्त हलारी पगड़ी में देखा गया। यह केवल फैशन नहीं, बल्कि भारत की ‘एकता में विविधता’ की जीवंत झलक हैब्रह्मकमल टोपी: उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान ,ब्रह्मकमल उत्तराखंड का राज्य पुष्प है और वहां की पारंपरिक टोपी उस क्षेत्र की संस्कृति, आस्था और प्रकृति से गहरे रूप से जुड़ी मानी जाती है पीएम मोदी द्वारा इस टोपी को पहनना पहाड़ी राज्यों की संस्कृति, लोक जीवन और सीमांत क्षेत्रों के प्रति सम्मान का प्रतीक माना गया। इससे पहले भी प्रधानमंत्री कई मौकों पर उत्तराखंड की पारंपरिक वेशभूषा अपनाकर वहां की संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर स्थान दे चुके हैंशाही हलारी पगड़ी: परंपरा और सम्मान का प्रतीकवहीं हलारी पगड़ी का संबंध गुजरात और कच्छ क्षेत्र की शाही परंपराओं से माना जाता है यह पगड़ी साहस, सम्मान और स्वाभिमान की प्रतीक रही है पीएम मोदी को यह पगड़ी एक शाही परिवार द्वारा भेंट की गई थी, जिसे उन्होंने गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर पहनकर उस सम्मान को पूरे देश के साथ साझा कियापीएम मोदी का यह अंदाज दर्शाता है कि वे सिर्फ भाषणों के जरिए ही नहीं, बल्कि अपने पहनावे और प्रतीकों के माध्यम से भी भारत की सांस्कृतिक विविधता को आगे बढ़ाते हैं

यही कारण है कि हर साल गणतंत्र दिवस पर उनका लुक सोशल मीडिया से लेकर आम चर्चाओं तक छाया रहता हैराजनीति से आगे सांस्कृतिक संदेशविशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह तरीका सांस्कृतिक कूटनीति का भी हिस्सा है जब देश का प्रधानमंत्री अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक पोशाक पहनता है, तो वह पूरे देश को यह संदेश देता है कि भारत की हर संस्कृति, हर परंपरा और हर क्षेत्र समान रूप से महत्वपूर्ण हैसोशल मीडिया पर भी पीएम मोदी के इस लुक को लेकर लोगों ने जमकर प्रतिक्रियाएं दीं कई यूजर्स ने इसे भारत की आत्मा का सम्मान बताया, तो कुछ ने कहा कि पीएम मोदी हर साल गणतंत्र दिवस को संस्कृति का उत्सव बना देते हैंकुल मिलाकर, गणतंत्र दिवस पर पीएम मोदी का लुक सिर्फ एक परिधान नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध विरासत, परंपरा और विविधता का प्रतीक बन चुका है, जो हर साल नए संदेश के साथ सामने आता है
